भारत में पैकेज्ड फूड पर सख्त रेड वार्निंग लेबल की तैयारी, सुप्रीम कोर्ट के दबाव के बाद नियमों में बदलाव के संकेत

VoS NEWS DESK | INDIA | 13 September 2026

FSSAI की शुरुआती योजना में ऐसे उत्पादों पर रेड वार्निंग लेबल लगाने का प्रस्ताव था जिनमें तीन प्रमुख पोषक तत्वों—अतिरिक्त चीनी, नमक और संतृप्त वसा—में से कम से कम दो की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक हो। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे कई ऐसे उत्पाद चेतावनी से बच सकते हैं जिनमें किसी एक हानिकारक तत्व की मात्रा काफी अधिक है।

अब सरकार के रुख में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की ओर से स्पष्ट समयसीमा और कार्ययोजना मांगे जाने के बाद FSSAI ने कहा है कि वह एक ही चरण में अधिक सख्त चेतावनी व्यवस्था लागू करने के विकल्प पर विचार करने के लिए तैयार है। अदालत ने केंद्र से पैकेज्ड फूड पर चेतावनी लेबल लागू करने की स्पष्ट प्रक्रिया बताने को कहा है।

इस प्रस्ताव का सीधा असर भारत के बड़े पैकेज्ड फूड और पेय उद्योग पर पड़ सकता है। भारत का यह बाजार करीब 100 अरब डॉलर का माना जाता है और इसमें बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ-साथ घरेलू खाद्य निर्माता भी शामिल हैं। उद्योग से जुड़े समूहों का तर्क है कि बहुत सख्त लेबलिंग नियमों से कई लोकप्रिय उत्पादों की छवि और बिक्री प्रभावित हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से पैकेज्ड खाद्य पदार्थों में मौजूद अधिक चीनी, नमक और संतृप्त वसा को लेकर चिंता जताते रहे हैं। उनका कहना है कि उपभोक्ताओं को पैकेज के पीछे लिखी लंबी पोषण संबंधी जानकारी पढ़ने के बजाय सामने ही स्पष्ट चेतावनी मिलनी चाहिए, ताकि खरीदारी के समय स्वस्थ विकल्प चुनना आसान हो।

दूसरी ओर, खाद्य कंपनियों और उद्योग संगठनों ने प्रस्तावित सीमा और लेबलिंग की पद्धति की समीक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि 100 ग्राम के आधार पर पोषक तत्वों का आकलन करने के बजाय serving size को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। कंपनियों को आशंका है कि सख्त लाल चेतावनी लेबल उनके उत्पादों की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

भारत में खाद्य सुरक्षा को लेकर व्यापक कार्रवाई भी तेज हुई है। हाल के महीनों में अधिकारियों ने रेस्तरां, खाद्य निर्माताओं और वितरण केंद्रों पर छापे मारे हैं तथा गलत लेबलिंग, समाप्त हो चुके उत्पादों और स्वच्छता संबंधी उल्लंघनों की जांच की है। Reuters के अनुसार, वर्ष 2020 से हर साल जांचे गए खाद्य नमूनों में लगभग पांचवां हिस्सा असुरक्षित या गलत तरीके से लेबल किया हुआ पाया गया है।

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भारत में पैकेज्ड फूड की लेबलिंग पर चल रही बहस केवल उद्योग और सरकार के बीच नियामकीय विवाद नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, उपभोक्ता अधिकार और खाद्य उद्योग की जवाबदेही से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुकी है।

यदि सरकार एकल पोषक तत्व के आधार पर भी स्पष्ट रेड वार्निंग लागू करती है, तो उपभोक्ताओं को खाद्य उत्पादों के संभावित स्वास्थ्य जोखिमों की जानकारी अधिक आसानी से मिल सकती है। हालांकि, सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि नियम वैज्ञानिक आधार पर हों और छोटे तथा बड़े खाद्य निर्माताओं पर समान रूप से लागू किए जाएं।

Source: ReutersReuters Food Safety Report

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