VoS NEWS DESK | SCIENCE & TECHNOLOGY | 12 September 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय स्पेस समिट में भारत की भविष्य की अंतरिक्ष योजनाओं को दुनिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को लगातार बढ़ा रहा है और आने वाले वर्षों में मानव अंतरिक्ष उड़ान, चंद्र मिशन और अंतरिक्ष स्टेशन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
भारत की इस योजना का प्रमुख हिस्सा भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन यानी Bharatiya Antariksh Station (BAS) है। सरकार के अनुसार यह स्टेशन कुल पांच मॉड्यूल से मिलकर बनाया जाना है। इसके पहले मॉड्यूल BAS-01 को 2028 तक लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि सभी पांच मॉड्यूल के साथ स्टेशन को 2035 तक पूरी तरह स्थापित करने की योजना है।
BAS के निर्माण से भारत को लंबे समय तक मानव अंतरिक्ष मिशनों और माइक्रोग्रैविटी अनुसंधान के लिए अपना स्वतंत्र प्लेटफॉर्म मिल सकता है। प्रस्तावित स्टेशन में अंतरिक्ष यात्रियों के रहने की सुविधाओं के साथ वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए विशेष व्यवस्थाएं विकसित की जानी हैं।
सरकार के अनुसार भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन पर लाइफ साइंस, फार्मास्यूटिकल्स, मटेरियल साइंस और मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में माइक्रोग्रैविटी प्रयोग किए जा सकते हैं। इसके अलावा स्टेशन के लिए डॉकिंग, रोबोटिक्स और इन-ऑर्बिट रिफ्यूलिंग जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों को विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है।
यह पूरा कार्यक्रम भारत के गगनयान मिशन से भी जुड़ा हुआ है। गगनयान के तहत मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए आवश्यक तकनीकों और बुनियादी ढांचे को विकसित किया जा रहा है। सरकार ने BAS के पहले मॉड्यूल और उससे संबंधित मिशनों को गगनयान कार्यक्रम के विस्तारित दायरे में शामिल किया है।
भारत का अगला बड़ा लक्ष्य चंद्रमा पर मानव मिशन भेजना है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि भारत 2040 तक एक भारतीय को चांद पर भेजने की दिशा में काम कर रहा है। यह मिशन भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम को पृथ्वी की निचली कक्षा से आगे चंद्रमा तक ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं में केवल मानव मिशन ही शामिल नहीं हैं। देश चंद्रमा, शुक्र और अन्य वैज्ञानिक अभियानों के साथ-साथ नई पीढ़ी के लॉन्च व्हीकल और उन्नत अंतरिक्ष तकनीकों पर भी काम कर रहा है। ISRO की दीर्घकालिक Space Vision 2047 में अंतरिक्ष स्टेशन, चंद्र मिशन और अंतरिक्ष विज्ञान अनुसंधान को प्रमुख स्थान दिया गया है।
प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी भारत की अंतरिक्ष रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने फ्रांस और अन्य देशों को भारत की अगली अंतरिक्ष यात्रा में साझेदार बनने का निमंत्रण दिया। भारत का मानना है कि अंतरिक्ष अनुसंधान में सहयोग से नई तकनीकों के विकास, वैज्ञानिक अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सकता है।
भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की भूमिका भी तेजी से बढ़ रही है। सरकार और ISRO निजी कंपनियों तथा स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। इससे लॉन्च सेवाओं, उपग्रह निर्माण और नई अंतरिक्ष तकनीकों के विकास में देश की क्षमता को और मजबूत करने की उम्मीद है।
VoS STRATEGIC INSIGHT
भारत का 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने और 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय भेजने का लक्ष्य देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम को एक नए चरण में ले जाने की कोशिश है। BAS भारत को लंबे समय के मानव अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए अपना स्वतंत्र वैज्ञानिक प्लेटफॉर्म उपलब्ध करा सकता है।
यदि भारत निर्धारित समयसीमा के अनुसार BAS के मॉड्यूल, गगनयान तकनीक और चंद्र मिशन की तैयारियां पूरी करता है, तो देश की वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में भूमिका और मजबूत हो सकती है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी भारत के Space Vision 2047 को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
Source: Press Information Bureau • Prime Minister’s Office • ISRO • Indian Express
