VoS NEWS DESK | भारत संस्कृति | 14 September 2026
मुंबई में प्रसिद्ध लालबागचा राजा के दर्शन के लिए पहले ही दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पंडाल के आसपास भारी भीड़ देखी गई और भक्तों ने लंबी कतारों में खड़े होकर गणपति के दर्शन किए। महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों से भी लोग प्रमुख गणेश मंडलों और पंडालों में पहुंच रहे हैं।
गणेश चतुर्थी महाराष्ट्र के सबसे बड़े और लोकप्रिय त्योहारों में से एक है। इस अवसर पर घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। मुंबई में लालबागचा राजा समेत कई प्रसिद्ध गणपति मंडलों में हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
इस वर्ष गणेशोत्सव की शुरुआत 14 सितंबर से हुई है और प्रमुख सार्वजनिक उत्सव अनंत चतुर्दशी तक जारी रहेगा। अलग-अलग परिवार और मंडल अपनी परंपरा के अनुसार गणपति प्रतिमा का डेढ़, तीन, पांच, सात या अन्य निर्धारित दिनों में विसर्जन भी करते हैं।
मुंबई के साथ-साथ पुणे, ठाणे, कोंकण, मराठवाड़ा और विदर्भ में भी गणपति बप्पा के स्वागत के लिए बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कई इलाकों में ढोल-ताशा पथक, शोभायात्राएं और पारंपरिक कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
हालांकि इस बार उत्सव के दौरान मौसम भी प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार मुंबई और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना बनी हुई है। मुंबई में 14 सितंबर को बारिश और आसपास के क्षेत्रों में भी वर्षा की गतिविधियां जारी रहने का अनुमान है।
बारिश की संभावना के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कमी नहीं दिखाई दे रही। प्रमुख पंडालों के आसपास सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था पर भी प्रशासन का ध्यान है, क्योंकि गणेशोत्सव के दौरान मुंबई की सड़कों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और वाहनों की आवाजाही होती है।
गणेशोत्सव का असर शहर की रोजमर्रा की गतिविधियों पर भी दिखाई दे रहा है। 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के कारण भारत के कई राज्यों में बैंक शाखाएं बंद हैं, हालांकि बैंक अवकाश राज्य के अनुसार अलग-अलग है।
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गणेश चतुर्थी केवल धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि महाराष्ट्र की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। मुंबई जैसे महानगर में बड़े सार्वजनिक गणपति उत्सव अलग-अलग समुदायों को एक साथ जोड़ने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में भी भूमिका निभाते हैं।
इस वर्ष भारी भीड़ के साथ बारिश की चुनौती प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा, यातायात नियंत्रण और पंडालों के आसपास भीड़ प्रबंधन आने वाले दिनों में सबसे अहम प्राथमिकताएं होंगी।
Source: Loksatta • Deccan Chronicle • NDTV Profit • Hindustan Times
