VoS NEWS DESK | विदेश नीति | 5 सितंबर 2026
जयशंकर ने ये टिप्पणियां पोलैंड की राजधानी वारसॉ में पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की के साथ बातचीत के बाद कीं। इससे पहले जयशंकर यूक्रेन की राजधानी कीव का दौरा कर चुके हैं, जहां उन्होंने यूक्रेनी नेतृत्व के साथ युद्ध और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की थी।
भारत का कहना है कि वह रूस और यूक्रेन दोनों के साथ संपर्क बनाए हुए है और किसी भी ऐसे प्रयास का समर्थन करने के लिए तैयार है जो संघर्ष को कम करने तथा शांति स्थापित करने में मदद कर सके। जयशंकर ने कहा कि नई दिल्ली विभिन्न विचारों और सुझावों पर विचार कर रही है, ताकि युद्ध के कारण पैदा हुए संकट को कम करने का रास्ता तलाशा जा सके।
भारत की कूटनीतिक स्थिति लंबे समय से यह रही है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष का स्थायी समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत और कूटनीति के जरिए खोजा जाना चाहिए। जयशंकर ने एक बार फिर इसी रुख को दोहराते हुए कहा कि केवल व्यापार या किसी विशेष वस्तु की खरीद रोकने से युद्ध समाप्त नहीं होगा। उनके अनुसार संघर्ष को खत्म करने के लिए सीधे संवाद और राजनीतिक समाधान की आवश्यकता है।
रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भी भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवालों का सामना करना पड़ रहा है। जयशंकर ने भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी बड़े देश की ऊर्जा सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भारत का तर्क है कि रूस से तेल की खरीद को रोकना अपने आप में युद्ध समाप्त करने का उपाय नहीं है।
यूक्रेन यात्रा के दौरान जयशंकर ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी बातचीत की। भारत ने इस दौरान संघर्ष के मानवीय और आर्थिक प्रभावों के साथ-साथ काला सागर में भारतीय नाविकों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी ध्यान दिया।
पोलैंड में जयशंकर की बातचीत का दायरा केवल रूस-यूक्रेन युद्ध तक सीमित नहीं रहा। भारत और पोलैंड ने व्यापार, रक्षा सहयोग, आपूर्ति श्रृंखला, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा और व्यापक भारत-यूरोप संबंधों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। दोनों पक्षों ने 2024-28 के संयुक्त कार्य योजना से जुड़ी प्रगति की भी समीक्षा की।
भारत की यह सक्रिय कूटनीतिक नीति ऐसे समय में सामने आ रही है जब रूस-यूक्रेन संघर्ष का प्रभाव यूरोप से आगे बढ़कर वैश्विक ऊर्जा, खाद्य और व्यापार व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। नई दिल्ली का प्रयास है कि वह रूस और पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों को बनाए रखते हुए शांति प्रक्रिया में रचनात्मक भूमिका निभा सके।
VoS DIPLOMATIC INSIGHT
भारत की मौजूदा रणनीति संतुलित कूटनीति और संवाद पर आधारित दिखाई देती है। रूस और यूक्रेन दोनों के साथ संपर्क बनाए रखना नई दिल्ली को संभावित शांति प्रयासों में एक मध्यस्थ या सहयोगी भूमिका निभाने का अवसर दे सकता है। हालांकि युद्ध समाप्त कराने की वास्तविक सफलता रूस और यूक्रेन की राजनीतिक इच्छा तथा व्यापक अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयासों पर निर्भर करेगी।
Sources: Press Information/News on AIR / The Indian Express / Hindustan Times / VoS News Desk.
