ओबीसी 'क्रीमी लेयर' मापदंड: सुप्रीम कोर्ट में विशेष पीठ का गठन

VoS NEWS DESK | NEW DELHI | 26 August 2026

सुप्रीम कोर्ट ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा (CSE) में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के 'ک्रीमी लेयर' (Creamy Layer) मापदंडों और सफल अभ्यर्थियों के सेवा आवंटन से जुड़ी केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण याचिका पर विचार करने के लिए विशेष पीठ (Special Bench) गठित करने की सहमति दी है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों पर ध्यान देते हुए मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

यह कानूनी संकट सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च 2026 के उस ऐतिहासिक फैसले के बाद उत्पन्न हुआ है, जिसमें अदालत ने स्पष्ट किया था कि केवल माता-पिता की वेतन आय (Salary Income) या संपत्ति के आधार पर क्रीमी लेयर का निर्धारण नहीं किया जा सकता। सर्वोच्च अदालत ने माना था कि 8 सितंबर 1993 के मूल आधिकारिक ज्ञापन (1993 Office Memorandum) के तहत क्रीमी लेयर तय करने के लिए माता-पिता के पदीय दर्जे (Social & Parental Status) का आकलन अनिवार्य है, और 14 अक्टूबर 2004 के उस स्पष्टीकरण पत्र को खारिज कर दिया, जिसके तहत सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) तथा निजी क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों के बच्चों पर केवल वेतन आय का 8 लाख रुपये वार्षिक का दायरा लागू किया जा रहा था। अदालत ने इसे सरकारी कर्मचारियों और निजी/पीएसयू कर्मचारियों के बच्चों के बीच भेदभावपूर्ण करार दिया था।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाकर अनुरोध किया है कि इस फैसले को 'भविष्यव्यापी प्रभाव' (Prospective Effect) से लागू करने की अनुमति दी जाए। सरकार का तर्क है कि 6 मार्च 2026 को घोषित सिविल सेवा परीक्षा (CSE 2025) के अंतिम परिणामों में कुल 958 अभ्यर्थियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS), اور भारतीय विदेश सेवा (IFS) जैसी कैडर सेवाओं के लिए अनुशंसित किया गया है। चूंकि यह चयन प्रक्रिया 11 मार्च के फैसले से पहले पूर्ण हो चुकी थी, इसलिए फैसले को भूतलक्षी (Retrospective) रूप से लागू करने से पूरा सेवा आवंटन (Service Allocation) बाधित हो जाएगा।

सरकार ने अदालत को आगाह किया है कि इस चरण पर नियमों को बदलने से न केवल लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) मसूरी में होने वाले फाउंडेशन कोर्स का प्रशिक्षण कैलेंडर प्रभावित होगा, बल्कि वरिष्ठता, कैडर आवंटन और पिछले वर्षों (2016 से लागू) के लगभग 100 अन्य प्रभावित उम्मीदवारों के दावों के कारण एक गंभीर प्रशासनिक गतिरोध खड़ा हो जाएगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ का आगामी निर्णय न केवल 958 अभ्यर्थियों के प्रशासनिक भविष्य को तय करेगा, बल्कि भारत में भविष्य की सभी केंद्रीय सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में ओबीसी आरक्षण के प्रशासनिक ढांचे की दिशा भी निर्धारित करेगा।

Source: VoS and International News Desks 

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