NTA परीक्षा सुधारों पर जनता से सुझाव मांगे गए, छात्रों और अभिभावकों की राय से बदलेगी देश की परीक्षा व्यवस्था

VoS NEWS DESK | शिक्षा | 5 सितंबर 2026

सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में सुधार के लिए Infosys के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया है। इस समिति को परीक्षा संचालन, सुरक्षा, प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया, प्रशासन और तकनीकी व्यवस्था समेत सार्वजनिक परीक्षाओं के विभिन्न पहलुओं की व्यापक समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है।

टास्क फोर्स का उद्देश्य ऐसी परीक्षा प्रणाली तैयार करना है जो मजबूत, सुरक्षित, पारदर्शी, समान अवसर वाली और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप हो। सरकार विशेष रूप से परीक्षा में होने वाली अनियमितताओं को रोकने, संस्थागत जवाबदेही बढ़ाने और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल पर विचार कर रही है।

सरकार ने सुझावों के लिए कई प्रमुख क्षेत्रों को चिन्हित किया है। इनमें परीक्षा संचालन और सुरक्षा, प्रश्नपत्रों की डिजाइन एवं मूल्यांकन पद्धति, संस्थागत जवाबदेही, परीक्षा में अनुचित साधनों की रोकथाम, सुरक्षित कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली, परीक्षा केंद्रों के बुनियादी ढांचे और छात्रों के लिए बेहतर पहुंच जैसे मुद्दे शामिल हैं।

इसके अलावा छात्रों की मानसिक और भावनात्मक भलाई को भी सुधार प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। सरकार का मानना है कि परीक्षा व्यवस्था केवल प्रश्नपत्र और परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि पूरी प्रक्रिया के दौरान छात्रों के अनुभव को भी बेहतर बनाया जाना चाहिए। शिकायतों के समाधान और छात्रों तथा परीक्षा संस्थाओं के बीच बेहतर संवाद पर भी सुझाव मांगे गए हैं।

यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब भारत में NTA द्वारा आयोजित कई महत्वपूर्ण परीक्षाओं को लेकर प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परीक्षा संचालन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर लगातार चर्चा हुई है। इन घटनाओं के बाद परीक्षा प्रणाली में तकनीकी और संस्थागत बदलावों की मांग तेज हुई है। सरकार अब अलग-अलग घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने के बजाय पूरे सार्वजनिक परीक्षा ढांचे की व्यापक समीक्षा करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

NTA में भी व्यापक पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू की गई है। रिपोर्टों के अनुसार एजेंसी ने अपने परीक्षा पैनल में शामिल लगभग 600 विशेषज्ञों को हटाकर नए विशेषज्ञों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की है। प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता और त्रुटियों की पहचान के लिए चार-स्तरीय जांच व्यवस्था लागू करने की भी योजना बनाई गई है।

प्रस्तावित सुधारों में तकनीक की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। सुरक्षित कंप्यूटर आधारित टेस्टिंग, बेहतर साइबर सुरक्षा और परीक्षा से जुड़े संवेदनशील डेटा की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। NTA देशभर में अधिक कंप्यूटर आधारित परीक्षा केंद्र विकसित करने के लिए तकनीकी संस्थानों के संसाधनों का इस्तेमाल करने की संभावनाएं भी तलाश रही है।

सरकार ने सुझाव देने के लिए 13 सितंबर 2026 की अंतिम तारीख निर्धारित की है। सुझाव अंग्रेजी, हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में दिए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्रों और अन्य हितधारकों की राय इस प्रक्रिया तक पहुंच सके।

इस सार्वजनिक परामर्श का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि परीक्षा व्यवस्था से सीधे जुड़े छात्रों और अभिभावकों को अपनी समस्याएं सामने रखने का अवसर मिल रहा है। आवेदन प्रक्रिया, परीक्षा केंद्र, तकनीकी समस्याएं, प्रश्नपत्र की गुणवत्ता, परिणाम, शिकायत निवारण और परीक्षा के दौरान होने वाली परेशानियों जैसे मुद्दों पर मिलने वाली प्रतिक्रिया भविष्य की नीति को प्रभावित कर सकती है।

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NTA और सार्वजनिक परीक्षाओं में सुधार की यह पहल भारत की परीक्षा व्यवस्था में लंबे समय से उठ रहे सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही के सवालों के बीच महत्वपूर्ण कदम है। यदि छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से प्राप्त सुझावों को वास्तविक नीतिगत बदलावों में बदला जाता है, तो इससे परीक्षा प्रक्रिया में भरोसा बढ़ सकता है। हालांकि सुधारों की सफलता केवल नई तकनीक या नियम बनाने पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि उनके सख्त, पारदर्शी और लगातार लागू होने पर भी निर्भर होगी।

Sources: Press Information Bureau (Government of India) / Hindustan Times / The Indian Express / NDTV / VoS News Desk.

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