VoS NEWS DESK | शिक्षा | 17 अगस्त 2026
NTA के अनुसार, जून 2026 में आयोजित UGC-NET परीक्षा के दौरान अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के प्रश्नपत्रों को लेकर उम्मीदवारों की ओर से कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं। शिकायतों में प्रश्नों की गुणवत्ता, दोहराए गए सवालों, तथ्यात्मक गलतियों और कुछ प्रश्नों के अनुवाद से संबंधित समस्याओं का उल्लेख किया गया था।
इन शिकायतों की जांच के लिए NTA ने एक समिति गठित की। समिति ने प्रश्नपत्रों की समीक्षा करने के बाद पाया कि समस्याएं इतनी व्यापक थीं कि केवल कुछ प्रश्नों को हटाकर या उत्तर कुंजी में बदलाव करके परीक्षा प्रक्रिया को निष्पक्ष नहीं बनाया जा सकता था। इसके बाद इन तीन विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का निर्णय लिया गया।
NTA ने बताया कि अंग्रेजी और कॉमर्स की पुनः परीक्षा 9 सितंबर को, जबकि समाजशास्त्र की परीक्षा 10 सितंबर को आयोजित की जाएगी। इन परीक्षाओं में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा देनी होगी। रिपोर्टों के अनुसार, इस पुनर्परीक्षा के लिए उम्मीदवारों से अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
UGC-NET भारत में विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में सहायक प्रोफेसर तथा जूनियर रिसर्च फेलोशिप के लिए पात्रता निर्धारित करने वाली महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है। इसलिए प्रश्नपत्र में गड़बड़ियों और परीक्षा दोबारा आयोजित किए जाने के फैसले का हजारों उम्मीदवारों के भविष्य पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
कई उम्मीदवारों ने सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर निराशा व्यक्त की है। छात्रों का कहना है कि उन्होंने परीक्षा के लिए महीनों तक तैयारी की थी और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने के लिए समय और धन खर्च किया। अब उन्हें दोबारा तैयारी करनी होगी और निर्धारित समय में फिर से परीक्षा देनी होगी।
इस फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने NTA और केन्द्र सरकार की परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों को परीक्षा एजेंसी की गलतियों का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया में जवाबदेही और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की मांग की।
NTA के सामने अब पुनर्परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित करने की बड़ी जिम्मेदारी है। उम्मीदवारों को समय पर एडमिट कार्ड, परीक्षा केंद्रों और अन्य जरूरी निर्देश उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण होगा। इसके साथ ही एजेंसी को यह सुनिश्चित करना होगा कि दोबारा आयोजित होने वाले प्रश्नपत्र में किसी प्रकार की त्रुटि या अनियमितता न हो।
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UGC-NET जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा में प्रश्नपत्र की गुणवत्ता और निष्पक्षता उम्मीदवारों के भविष्य से सीधे जुड़ी होती है। इसलिए प्रश्नपत्रों में गंभीर त्रुटियां सामने आने के बाद पुनर्परीक्षा कराने का फैसला परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
हालांकि, दोबारा परीक्षा का निर्णय उन छात्रों के लिए अतिरिक्त मानसिक और आर्थिक दबाव पैदा कर सकता है जिन्होंने पहले ही परीक्षा पूरी कर ली थी। NTA को इस स्थिति से निपटने के लिए उम्मीदवारों को स्पष्ट जानकारी, पर्याप्त तैयारी का समय और सुचारु परीक्षा व्यवस्था उपलब्ध करानी होगी।
यह मामला भारत की प्रतियोगी परीक्षाओं में गुणवत्ता नियंत्रण और जवाबदेही की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने, समीक्षा करने और अंतिम रूप देने की प्रक्रिया को और अधिक मजबूत करना जरूरी होगा।
स्रोत: VoS News Desk
