भारत-कनाडा CEPA वार्ता का चौथा दौर शुरू, 2030 तक व्यापार बढ़ाने पर जोर

VoS NEWS DESK | भारत अंतरराष्ट्रीय | 15 September 2026

नई दिल्ली में शुरू हुए चौथे दौर की बातचीत में वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, Rules of Origin, तकनीकी व्यापार बाधाएं और बाजार तक पहुंच जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं। यह दौर दोनों देशों के बीच CEPA वार्ता को आगे बढ़ाने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

इससे पहले तीसरा दौर जुलाई 2026 में कनाडा के ओटावा में आयोजित हुआ था। उस दौर में भी वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार के साथ-साथ बौद्धिक संपदा, Rules of Origin, सैनिटरी और फाइटोसैनिटरी उपाय तथा तकनीकी व्यापार बाधाओं जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी।

भारत और कनाडा ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, कनाडा सरकार के हालिया आधिकारिक दस्तावेजों में दोनों देशों ने व्यापार को CAD 70 अरब तक बढ़ाने की महत्वाकांक्षा भी व्यक्त की है।

CEPA वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब भारत और कनाडा के बीच 2025-26 में दोतरफा व्यापार घटकर करीब 7.95 अरब डॉलर रह गया, जबकि 2024-25 में यह लगभग 8.66 अरब डॉलर था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इसमें करीब 8.22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

भारत से कनाडा को जाने वाले प्रमुख उत्पादों में फार्मास्यूटिकल्स, लौह और इस्पात, समुद्री उत्पाद, कपास से बने वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक सामान और रसायन शामिल हैं। दूसरी ओर कनाडा से भारत आने वाले प्रमुख उत्पादों में दालें, कोयला, उर्वरक, कागज, पेट्रोलियम क्रूड तथा अन्य कच्चे माल शामिल हैं।

दोनों देशों के लिए सेवाओं का क्षेत्र भी महत्वपूर्ण है। भारत की ओर से कनाडा को दूरसंचार, कंप्यूटर और सूचना सेवाओं तथा अन्य व्यावसायिक सेवाओं का निर्यात किया जाता है।

CEPA केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, वित्तीय सेवाओं और निवेश जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं हैं।

कनाडा सरकार ने हालिया आर्थिक संवादों में भारत के साथ व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने, महत्वपूर्ण खनिजों और आपूर्ति श्रृंखलाओं में सहयोग तथा दीर्घकालिक संस्थागत निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दिया है।

भारत के लिए कनाडा का बाजार फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा और सेवाओं के निर्यात को बढ़ाने का अवसर प्रदान कर सकता है। वहीं कनाडा भारतीय बाजार में कृषि उत्पादों, ऊर्जा, खनिजों और अन्य संसाधन आधारित क्षेत्रों के लिए बेहतर अवसर तलाश रहा है।

भारत-कनाडा संबंधों में व्यापार के साथ-साथ लोगों के बीच संपर्क भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कनाडा में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं और वहां 4.25 लाख से अधिक भारतीय विद्यार्थी होने का उल्लेख व्यापार वार्ता से जुड़े अधिकारियों ने किया है।

इस कारण CEPA के व्यापक प्रभाव केवल व्यापार आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेंगे। शिक्षा, पेशेवर सेवाओं, निवेश और लोगों की आवाजाही से जुड़े मुद्दे भी दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं।

यदि समझौता सफलतापूर्वक पूरा होता है, तो दोनों देशों के कारोबारियों के लिए बाजार तक पहुंच बेहतर हो सकती है। शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं में कमी, व्यापार नियमों में स्पष्टता और निवेश सुरक्षा से कंपनियों के लिए भारत तथा कनाडा में लंबे समय की योजनाएं बनाना आसान हो सकता है।

हालांकि, कृषि, तकनीकी मानकों, Rules of Origin और संवेदनशील घरेलू उद्योगों से जुड़े मुद्दों पर दोनों पक्षों को समझौता करना होगा। कनाडा में हुई सार्वजनिक चर्चाओं में भी कृषि, गैर-टैरिफ बाधाओं, सेवाओं और नियामकीय मानकों को महत्वपूर्ण मुद्दों के रूप में सामने रखा गया है।

VoS INTERNATIONAL INSIGHT

भारत-कनाडा CEPA वार्ता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण नया चरण है। मौजूदा व्यापार स्तर लक्ष्य की तुलना में काफी कम है, इसलिए 2030 तक व्यापार को कई गुना बढ़ाने के लिए केवल शुल्क कम करना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए निवेश, सेवाओं, तकनीक, ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखलाओं में भी गहरा सहयोग जरूरी होगा।

भारत के लिए यह समझौता कनाडाई बाजार में अपने निर्यात को बढ़ाने और निवेश आकर्षित करने का अवसर बन सकता है। कनाडा के लिए भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और अमेरिका के बाहर व्यापार विविधीकरण की रणनीति में एक महत्वपूर्ण बाजार बन सकता है।

अब चौथे दौर की बातचीत में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देश कठिन मुद्दों पर कितनी तेजी से सहमति बनाते हैं और क्या वर्ष 2026 के अंत तक CEPA को अंतिम रूप देने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

Sources: Government of Canada / Economic Times / PTI / Indian trade authorities / VoS News Desk.

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