VoS NEWS DESK | भारत अंतरराष्ट्रीय | 15 September 2026
12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन भारत के लिए केवल बहुपक्षीय मंच नहीं रहा, बल्कि नई दिल्ली ने इसे अपनी व्यापक द्विपक्षीय कूटनीति को आगे बढ़ाने के अवसर के रूप में भी इस्तेमाल किया। प्रधानमंत्री मोदी की बैठकों में व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक राजनीतिक मुद्दे प्रमुख रहे।
मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस सहित कई प्रमुख नेताओं से मुलाकात की। इसके अलावा अफ्रीकी और एशियाई देशों के साथ भारत के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर भी बातचीत हुई।
BRICS सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाओं में मोदी और शी जिनपिंग की बैठक रही। शी की भारत यात्रा सात वर्षों के अंतराल के बाद हुई और दोनों देशों के बीच संबंधों को धीरे-धीरे स्थिर करने की कोशिशों को नया महत्व मिला। Reuters के अनुसार, सम्मेलन ने भारत-चीन संबंधों में संवाद और आर्थिक सहयोग की संभावनाओं को भी सामने रखा।
बैठक के बाद दोनों देशों की ओर से आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों को बातचीत के माध्यम से आगे बढ़ाने के संकेत भी मिले। भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और चीन के वाणिज्य मंत्री वांग वेंटाओ ने 14 सितंबर को आर्थिक और व्यापारिक चिंताओं को संतुलित तथा रचनात्मक तरीके से संबोधित करने पर सहमति जताई।
रूस के साथ भारत के लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक और आर्थिक संबंध भी BRICS एजेंडे में महत्वपूर्ण रहे। मोदी-पुतिन संपर्क ऐसे समय हुआ जब वैश्विक ऊर्जा बाजार, पश्चिमी प्रतिबंध और यूक्रेन युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़े बदलाव जारी हैं।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के साथ बातचीत भी पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण रही। भारत के लिए ईरान ऊर्जा, चाबहार बंदरगाह और मध्य एशिया तक संपर्क के लिहाज से रणनीतिक महत्व रखता है।
नई दिल्ली BRICS के विस्तारित 11-सदस्यीय ढांचे में विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने पर भी जोर देता रहा। सम्मेलन की घोषणा में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, सीमा-पार भुगतान प्रणालियों, AI, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक संस्थानों में विकासशील देशों के बेहतर प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को जगह मिली।
भारत ने समुद्री सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा के लिए Seafarers' Emergency Support Network का प्रस्ताव भी रखा। यह पहल भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था और वैश्विक समुद्री परिवहन में उसकी भूमिका को देखते हुए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
BRICS सम्मेलन के दौरान पश्चिम एशिया का संकट भी प्रमुख चर्चा का विषय रहा। ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे देशों की BRICS के साथ अलग-अलग स्तर पर भागीदारी भारत के लिए कूटनीतिक संतुलन का अवसर और चुनौती दोनों है।
भारत ने संघर्षों के बीच संवाद, स्थिरता और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। सम्मेलन में BRICS नेताओं ने खाड़ी क्षेत्र में शांति और वैश्विक ऊर्जा तथा आपूर्ति श्रृंखलाओं पर युद्ध के प्रभावों को लेकर भी चिंता व्यक्त की।
BRICS सम्मेलन के दौरान भारत ने एक ओर रूस और ईरान जैसे रणनीतिक साझेदारों के साथ संबंध बनाए रखे, वहीं चीन के साथ संवाद और अन्य एशियाई, अफ्रीकी तथा पश्चिमी देशों के साथ आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने की कोशिश की।
यह भारत की उस व्यापक विदेश नीति को दर्शाता है जिसमें नई दिल्ली किसी एक शक्ति-गुट पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था में अलग-अलग देशों के साथ अपने हितों के आधार पर संबंध मजबूत करना चाहती है।
VoS INTERNATIONAL INSIGHT
BRICS 2026 भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मंच साबित हुआ है। 15 द्विपक्षीय बैठकों ने दिखाया कि नई दिल्ली अब केवल BRICS के सामूहिक एजेंडे तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि सम्मेलन को अलग-अलग देशों के साथ व्यापार, सुरक्षा और रणनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने के लिए भी इस्तेमाल कर रही है।
चीन के साथ संवाद, रूस के साथ रणनीतिक साझेदारी, ईरान के साथ संपर्क और Global South के देशों के साथ बढ़ता सहयोग भारत की विदेश नीति के कई समानांतर आयामों को दर्शाता है। आने वाले महीनों में इन बैठकों के वास्तविक परिणाम व्यापार समझौतों, सुरक्षा सहयोग और क्षेत्रीय कूटनीतिक पहलों के रूप में सामने आ सकते हैं।
Sources: Reuters / Government of India, Ministry of External Affairs / Indian Express / AP / VoS News
