VoS NEWS DESK | खेल एवं बैडमिंटन | 2 नवंबर 2026
फाइनल के पहले गेम में लक्ष्य सेन और जोनाथन क्रिस्टी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। दोनों खिलाड़ियों ने तेज रैलियों, शानदार नेट शॉट्स और आक्रामक स्मैश के जरिए अंक हासिल करने की कोशिश की। हालांकि, महत्वपूर्ण क्षणों में लक्ष्य ने बेहतर नियंत्रण बनाए रखा और पहला गेम 21-17 से जीत लिया। दूसरे गेम में भारतीय खिलाड़ी ने अपनी गति और आक्रामकता को और बढ़ा दिया। लक्ष्य ने लगातार अंक हासिल करते हुए क्रिस्टी पर दबाव बनाया। इंडोनेशियाई खिलाड़ी ने वापसी करने का प्रयास किया, लेकिन लक्ष्य की बेहतरीन कोर्ट कवरेज, सटीक शॉट चयन और मजबूत रक्षात्मक खेल के सामने उन्हें संघर्ष करना पड़ा। लक्ष्य ने दूसरा गेम 21-10 से जीतकर खिताब पर कब्जा कर लिया।
यह जीत लक्ष्य के लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि उनका पिछला बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब नवंबर 2025 में ऑस्ट्रेलियन ओपन में आया था। हायलो ओपन 2026 की सफलता के साथ उन्होंने इस सीजन का अपना पहला खिताब हासिल किया। यह उनके करियर का सातवां बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब भी है और हायलो ओपन में उनकी दूसरी जीत है। इससे पहले उन्होंने 2019 में इसी प्रतियोगिता का खिताब जीता था, जब इसका नाम सारलोरलक्स ओपन था। लक्ष्य सेन का फाइनल तक का सफर भी आसान नहीं रहा। उन्हें टूर्नामेंट के शुरुआती मुकाबलों में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। फिनलैंड के जोआकिम ओल्डोर्फ के खिलाफ उन्होंने पहला गेम गंवाने के बाद शानदार वापसी की। इसके बाद भारतीय खिलाड़ी ने अपने हमवतन किरण जॉर्ज और फिनलैंड के काले कोलजोनेन के खिलाफ भी कठिन मुकाबलों में जीत हासिल की।
सेमीफाइनल में लक्ष्य का सामना फ्रांस के टोमा जूनियर पोपोव से हुआ। इस मुकाबले में उन्होंने 21-17 और 21-13 से जीत दर्ज कर फाइनल में जगह बनाई। लगातार कठिन मैच खेलने के बावजूद उन्होंने निर्णायक मुकाबले में अपनी लय बनाए रखी और खिताब हासिल किया। इस टूर्नामेंट में भारत के लिए खुशी का एक और अवसर तब आया जब पीवी सिंधु ने महिला एकल का खिताब जीता। सिंधु ने डेनमार्क की लाइन होजमार्क कजर्सफेल्ट को 21-12 और 21-14 से हराया। इस प्रकार भारत ने हायलो ओपन 2026 में पुरुष और महिला दोनों एकल वर्गों के खिताब अपने नाम किए।
VoS STRATEGIC INSIGHT
लक्ष्य सेन की यह जीत भारतीय बैडमिंटन के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। एक कठिन सीजन के बाद सुपर 500 स्तर का खिताब जीतना उनके लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाला परिणाम है। विश्व स्तर के खिलाड़ी जोनाथन क्रिस्टी के खिलाफ सीधे गेमों में जीत यह भी दिखाती है कि लक्ष्य निर्णायक मुकाबलों में अपनी रणनीति और खेल पर नियंत्रण बनाए रखने में सफल रहे। इस प्रतियोगिता में उनकी कोर्ट कवरेज, नेट पर नियंत्रण और आक्रामक स्मैश विशेष रूप से प्रभावशाली रहे। आधुनिक बैडमिंटन में केवल तेज शॉट लगाना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि खिलाड़ी को रक्षात्मक स्थिति से भी अवसर बनाना पड़ता है। लक्ष्य ने फाइनल में इन दोनों पहलुओं का अच्छा संतुलन दिखाया।
पीवी सिंधु और लक्ष्य सेन की एक ही दिन खिताबी जीत भारतीय बैडमिंटन के लिए दोहरी सफलता है। इससे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ियों की उपस्थिति और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को नई मजबूती मिली है। लक्ष्य के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण चुनौती इस प्रदर्शन को आगामी प्रतियोगिताओं में भी जारी रखना और विश्व स्तर पर लगातार अच्छे परिणाम हासिल करना होगी।
