VoS NEWS DESK | अर्थव्यवस्था एवं वित्तीय समाचार | 2 नवंबर 2026
केंद्र सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में भारत का कुल सकल GST संग्रह ₹2,31,290 करोड़ रहा, जो अक्टूबर 2025 के ₹1,88,125 करोड़ की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। यह जुलाई 2017 में GST व्यवस्था लागू होने के बाद दर्ज किए गए सबसे बड़े मासिक संग्रहों में से एक है। इस प्रदर्शन को देश में आर्थिक गतिविधियों, व्यापारिक लेनदेन और कर संग्रह प्रणाली में सुधार के महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अक्टूबर के दौरान घरेलू बिक्री और सेवाओं से प्राप्त GST राजस्व 15.8 प्रतिशत बढ़कर ₹1,59,044 करोड़ पहुंच गया। पिछले वर्ष इसी अवधि में घरेलू GST संग्रह लगभग ₹1.37 लाख करोड़ था। दूसरी ओर, आयात से प्राप्त GST राजस्व में और अधिक तेजी देखने को मिली। आयात से होने वाली कर आय 42.2 प्रतिशत बढ़कर ₹72,246 करोड़ हो गई, जबकि अक्टूबर 2025 में यह ₹50,796 करोड़ थी। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि अक्टूबर के कुल राजस्व में आयात से संबंधित कर संग्रह ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर के कुल GST संग्रह में केंद्रीय GST (CGST) के रूप में ₹42,935 करोड़ प्राप्त हुए, जबकि राज्य GST (SGST) का योगदान ₹51,340 करोड़ रहा। एकीकृत GST (IGST) के तहत लगभग ₹1,37,015 करोड़ का संग्रह दर्ज किया गया। IGST में अंतरराज्यीय व्यापार और आयात से संबंधित कर राजस्व शामिल होता है। इस प्रकार विभिन्न कर श्रेणियों से प्राप्त राशि ने मिलकर अक्टूबर के कुल GST संग्रह को ₹2.31 लाख करोड़ तक पहुंचाया। सरकार के लिए एक अन्य सकारात्मक पहलू शुद्ध GST राजस्व में दर्ज वृद्धि रही। अक्टूबर महीने में करदाताओं और कारोबारियों को दिए गए रिफंड को समायोजित करने के बाद शुद्ध GST संग्रह ₹2,03,356 करोड़ रहा। यह पिछले वर्ष अक्टूबर के ₹1,61,900 करोड़ की तुलना में 25.6 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान कुल GST रिफंड में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई और सरकार ने ₹27,934 करोड़ के रिफंड जारी किए। शुद्ध राजस्व में यह बढ़ोतरी सरकारी वित्तीय स्थिति और कर संग्रह की गति के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले सात महीनों यानी अप्रैल से अक्टूबर के दौरान भी GST संग्रह में सकारात्मक रुझान बना रहा। इस अवधि में सकल GST संग्रह 13.2 प्रतिशत बढ़कर लगभग ₹14.77 लाख करोड़ पहुंच गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह लगभग ₹13.05 लाख करोड़ था। वहीं, रिफंड के बाद शुद्ध GST राजस्व 12.6 प्रतिशत बढ़कर ₹12.69 लाख करोड़ हो गया। यह आंकड़े संकेत देते हैं कि मासिक संग्रह में उतार-चढ़ाव के बावजूद वित्त वर्ष के शुरुआती सात महीनों में कर राजस्व की वृद्धि जारी रही है। राज्यों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो महाराष्ट्र अक्टूबर में घरेलू GST संग्रह के मामले में सबसे आगे रहा। राज्य ने ₹35,150 करोड़ का संग्रह दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 13 प्रतिशत अधिक है। कर्नाटक का GST संग्रह 18 प्रतिशत बढ़कर ₹15,922 करोड़ और गुजरात का संग्रह 16 प्रतिशत बढ़कर ₹13,516 करोड़ पहुंच गया। हरियाणा में 17 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ₹11,529 करोड़ का राजस्व दर्ज किया गया। इन राज्यों में औद्योगिक गतिविधियों, व्यापार और उपभोक्ता मांग का कर संग्रह में योगदान महत्वपूर्ण रहा।
कुछ राज्यों में वृद्धि की दर अपेक्षाकृत अधिक रही। असम ने अक्टूबर में 47 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जबकि झारखंड में 31 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। उत्तर प्रदेश और बिहार दोनों राज्यों में घरेलू GST संग्रह में 24 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। दूसरी ओर, तमिलनाडु में वृद्धि लगभग 3 प्रतिशत रही, जबकि हिमाचल प्रदेश में संग्रह में 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे पता चलता है कि देश के विभिन्न राज्यों में आर्थिक गतिविधियों और कर राजस्व की वृद्धि एक समान नहीं रही। अक्टूबर के मजबूत GST आंकड़ों के पीछे त्योहारी सीजन के दौरान बढ़ी खरीदारी और व्यापारिक गतिविधियों को भी एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। त्योहारों के समय इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन, कपड़े, घरेलू सामान और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की मांग में वृद्धि होती है। इससे बाजार में लेनदेन बढ़ता है और GST संग्रह को समर्थन मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार, त्योहारी खरीदारी के साथ बेहतर कर अनुपालन और डिजिटल लेनदेन की बढ़ती भूमिका भी राजस्व में सुधार में योगदान दे सकती है। GST परिषद की हालिया बैठकों में कर व्यवस्था को सरल बनाने और कारोबारियों के लिए अनुपालन प्रक्रिया को आसान करने से जुड़े कई प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई है। इनमें छोटे कारोबारियों के लिए GST पंजीकरण को सरल बनाना, रिफंड प्रक्रिया में तेजी लाना और कर प्रशासन में तकनीकी सुधार शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य करदाताओं के लिए प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाते हुए कर चोरी पर नियंत्रण और राजस्व संग्रह को मजबूत करना है।
VoS STRATEGIC INSIGHT
अक्टूबर में GST संग्रह का ₹2.31 लाख करोड़ तक पहुंचना भारत की वित्तीय व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। 22.9 प्रतिशत की सालाना वृद्धि यह दर्शाती है कि देश में कर संग्रह की गति मजबूत बनी हुई है। घरेलू बाजार से प्राप्त राजस्व में वृद्धि उपभोक्ता गतिविधियों और व्यापारिक लेनदेन के विस्तार का संकेत देती है, जबकि आयात से मिलने वाले कर राजस्व में तेज बढ़ोतरी ने कुल संग्रह को अतिरिक्त मजबूती प्रदान की है। हालांकि, आयात से प्राप्त राजस्व में 42.2 प्रतिशत की वृद्धि और घरेलू संग्रह में 15.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बीच अंतर पर भी ध्यान देना आवश्यक है। किसी अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक मजबूती के लिए केवल आयात आधारित कर राजस्व पर्याप्त नहीं होता। घरेलू उत्पादन, विनिर्माण, छोटे और मध्यम उद्योगों तथा सेवाओं के क्षेत्र में निरंतर विकास भी जरूरी है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं और अर्थव्यवस्था को अधिक व्यापक आधार मिल सकता है।
राज्यों के बीच GST संग्रह में अलग-अलग वृद्धि दरें भी क्षेत्रीय आर्थिक परिस्थितियों को समझने का अवसर देती हैं। असम, झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में तेज वृद्धि के साथ-साथ महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात का बड़ा योगदान देश के आर्थिक मानचित्र में विभिन्न क्षेत्रों की भूमिका को दर्शाता है। भविष्य में राज्यों के बीच संतुलित औद्योगिक विकास और बेहतर कर अनुपालन को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण होगा। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण रहेगा कि त्योहारी मांग के बाद भी GST संग्रह की वृद्धि कितनी स्थिर रहती है। यदि घरेलू खपत, औद्योगिक उत्पादन और व्यापारिक गतिविधियों में लगातार विस्तार बना रहता है, तो सरकार के राजस्व को आगे भी समर्थन मिल सकता है। हालांकि, वास्तविक आर्थिक मजबूती का आकलन केवल GST संग्रह से नहीं, बल्कि रोजगार, निवेश, उत्पादन और आम नागरिकों की क्रय शक्ति जैसे व्यापक संकेतकों के आधार पर भी किया जाना चाहिए।
