जयशंकर ने मॉस्को में पुतिन से की मुलाकात, भारत-रूस संबंधों और आर्थिक सहयोग पर अहम चर्चा

VoS NEWS DESK | INDIA-RUSSIA | 25 August 2026

एस. जयशंकर की रूस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई मुलाकात को भारत-रूस संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों पक्षों ने लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की।

बैठक में द्विपक्षीय व्यापार, निवेश, ऊर्जा सहयोग और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

भारत और रूस के बीच ऊर्जा क्षेत्र लंबे समय से प्रमुख सहयोग का क्षेत्र रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार में हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण बदलाव आया है और नई दिल्ली मॉस्को के साथ आर्थिक संबंधों को और व्यापक बनाने की कोशिश कर रही है।

जयशंकर ने रूस के साथ भारत के आर्थिक सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि का उल्लेख किया। भारत का प्रयास है कि दोनों देशों के बीच व्यापार को संतुलित बनाया जाए और भुगतान तथा लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों को कम किया जाए।

रूस के साथ भारत के संबंध ऐसे समय में भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं जब वैश्विक स्तर पर मॉस्को को लेकर पश्चिमी देशों का दबाव जारी है। नई दिल्ली ने लगातार अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर जोर दिया है और विभिन्न शक्तियों के साथ समानांतर संबंध बनाए रखने की कोशिश की है।

भारत रूस से रक्षा उपकरणों और ऊर्जा संसाधनों की खरीद के अलावा अब व्यापार, निवेश, तकनीक और अन्य आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी ध्यान दे रहा है।

मुलाकात के दौरान वैश्विक संघर्षों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना रही। भारत ने कई मौकों पर संवाद और कूटनीतिक समाधान के महत्व को रेखांकित किया है।

जयशंकर की रूस यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत एक ओर अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर रूस और अन्य प्रमुख शक्तियों के साथ पारंपरिक रणनीतिक साझेदारी को भी बनाए हुए है।

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भारत-रूस संबंध नई दिल्ली की बहु-दिशीय विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं। रूस के साथ ऊर्जा और रक्षा सहयोग के साथ अब आर्थिक तथा व्यापारिक संबंधों को विस्तार देना भारत की प्राथमिकताओं में शामिल है।

मॉस्को के साथ मजबूत संबंध भारत को वैश्विक शक्ति संतुलन में रणनीतिक विकल्प प्रदान करते हैं। हालांकि, भारत के लिए चुनौती यह है कि वह रूस के साथ अपने पारंपरिक संबंधों को बनाए रखते हुए अमेरिका, यूरोप और अन्य साझेदारों के साथ भी अपने रिश्तों में संतुलन कायम रखे।

जयशंकर और पुतिन की मुलाकात इस व्यापक रणनीति का एक और संकेत है कि भारत अपनी विदेश नीति में किसी एक शक्ति पर निर्भर रहने के बजाय कई वैश्विक साझेदारों के साथ समानांतर सहयोग बढ़ाना चाहता है।

Source: Reuters / VoS News Desk

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