VoS NEWS DESK | DIPLOMACY | 6 सितंबर 2026
जयशंकर ने कीव में यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ बातचीत की और बाद में यूक्रेनी नेतृत्व से भी मुलाकात की। भारतीय पक्ष ने स्पष्ट किया कि युद्ध का समाधान युद्धक्षेत्र के बजाय संवाद, कूटनीति और बातचीत के माध्यम से तलाशना होगा। यूक्रेन ने भी भारत की शांति संबंधी पहल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के युद्ध समाप्त करने के आह्वान का स्वागत किया।
भारत ने इस दौरान अपनी रणनीतिक स्वायत्तता पर भी जोर दिया। जयशंकर ने संकेत दिया कि रूस से ऊर्जा खरीद जैसे आर्थिक फैसलों को युद्ध समाप्त करने का एकमात्र साधन नहीं माना जा सकता। भारत के अनुसार स्थायी समाधान के लिए दोनों पक्षों के बीच वास्तविक राजनीतिक और कूटनीतिक बातचीत आवश्यक है।
यूक्रेन यात्रा के दौरान काला सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों और भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठा। भारत ने कहा कि समुद्री असुरक्षा का प्रभाव केवल यूरोप तक सीमित नहीं है, बल्कि ईंधन, खाद और खाद्य आपूर्ति के माध्यम से ग्लोबल साउथ पर भी पड़ता है। भारत ने युद्ध शुरू होने के बाद यूक्रेन को मानवीय सहायता की कई खेप भेजने की जानकारी भी दी।
यूक्रेन के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना भी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। दोनों देशों के बीच फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, खाद्य, मशीनरी, रसायन और उपभोक्ता वस्तुओं में व्यापार जारी है। जयशंकर ने डिजिटल तकनीक, स्टार्टअप, नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में भविष्य के सहयोग की संभावनाओं पर भी जोर दिया।
पोलैंड में जयशंकर ने उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की के साथ रूस-यूक्रेन संघर्ष, वैश्विक स्थिरता, खाद्य एवं ईंधन सुरक्षा और सप्लाई चेन जैसे मुद्दों पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने भारत-पोलैंड Joint Action Plan 2024–28 के तहत व्यापार, रक्षा और बहुपक्षीय सहयोग की समीक्षा भी की।
भारत की इस यात्रा का एक व्यापक संदेश यह भी है कि नई दिल्ली एक साथ रूस, यूक्रेन और यूरोपीय देशों के साथ संवाद बनाए रखना चाहती है। विदेश मंत्रालय ने यात्रा को द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने तथा क्षेत्रीय घटनाक्रम और साझा हितों पर विचार-विमर्श का अवसर बताया था।
VoS STRATEGIC INSIGHT
जयशंकर की यात्रा भारत की strategic autonomy की नीति का महत्वपूर्ण उदाहरण है। नई दिल्ली रूस के साथ अपने पारंपरिक संबंध बनाए रखते हुए यूक्रेन और यूरोपीय देशों के साथ भी सक्रिय संवाद कर रही है।
भारत के लिए सबसे बड़ा अवसर यह है कि वह किसी औपचारिक मध्यस्थ की भूमिका ग्रहण किए बिना संवाद, मानवीय सहायता और कूटनीतिक संपर्क के माध्यम से शांति प्रक्रिया में योगदान दे सके। यदि मॉस्को और कीव दोनों भारतीय संपर्क को स्वीकार करते हैं, तो आने वाले समय में भारत की कूटनीतिक भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है।
Source: Ministry of External Affairs, Government of India / Indian Express / The New Indian Express / Reuters
