VoS NEWS DESK | भारत | 29 अगस्त 2026
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार मजबूत हो रहा है और अब देश ने अपने इतिहास में पहली बार 729.33 अरब डॉलर का नया रिकॉर्ड दर्ज किया है। RBI के अनुसार, एक सप्ताह के दौरान भंडार में 12.42 अरब डॉलर की उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
इस बढ़ोतरी के साथ भारत ने फरवरी 2026 में दर्ज लगभग 728.49 अरब डॉलर के पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता और प्रमुख मुद्राओं में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत की विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां करीब 9.48 अरब डॉलर बढ़कर 591.33 अरब डॉलर हो गईं, जबकि देश के स्वर्ण भंडार के मूल्य में लगभग 2.80 अरब डॉलर की वृद्धि हुई और यह 114.22 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
विदेशी मुद्रा भंडार में यह तेजी मुख्य रूप से विदेशों से आने वाली डॉलर की मजबूत आमद से जुड़ी है। RBI द्वारा जून में उठाए गए कुछ कदमों ने बैंकों और गैर-निवासी भारतीयों को विदेशी मुद्रा जमा बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।
RBI की विशेष व्यवस्था के तहत NRI जमा और अन्य विदेशी मुद्रा प्रवाह में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। रिपोर्टों के अनुसार, जून से 21 अगस्त के बीच इन उपायों के माध्यम से करीब 73 अरब डॉलर का प्रवाह हुआ, जिसमें लगभग 65 अरब डॉलर NRI जमा से आया।
इतने बड़े विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि भारत को वैश्विक आर्थिक झटकों से निपटने के लिए अधिक वित्तीय सुरक्षा मिलती है। पर्याप्त भंडार रुपये पर दबाव बढ़ने की स्थिति में RBI को विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करने की अधिक क्षमता देता है।
भारत की अर्थव्यवस्था के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज वृद्धि होने पर भारत को अधिक डॉलर की आवश्यकता होती है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार ऐसी परिस्थितियों में बाहरी दबाव को संभालने में मदद कर सकता है।
विदेशी मुद्रा भंडार का ऊंचा स्तर निवेशकों के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जाता है। इससे यह संदेश जाता है कि भारत के पास आयात भुगतान और बाहरी वित्तीय दायित्वों को पूरा करने के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा उपलब्ध है।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि केवल रिकॉर्ड भंडार को आर्थिक मजबूती का एकमात्र पैमाना नहीं माना जाना चाहिए। वैश्विक पूंजी प्रवाह, रुपये की स्थिति, व्यापार घाटा, तेल की कीमतें और विदेशी निवेश जैसे कई अन्य कारक भी भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति को प्रभावित करते हैं।
इसके बावजूद, मौजूदा रिकॉर्ड भारत के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय सुरक्षा कवच उपलब्ध कराता है। Business Standard के अनुसार, यह भंडार भारत के एक वर्ष से अधिक के माल आयात को कवर करने की क्षमता रखता है और देश के बाहरी ऋण के मुकाबले भी मजबूत स्थिति प्रदान करता है।
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भारत का 729.33 अरब डॉलर का रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार देश की बाहरी आर्थिक स्थिति के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह भारत को वैश्विक बाजारों में अचानक आने वाले झटकों, तेल की कीमतों में वृद्धि और रुपये पर पड़ने वाले दबाव से निपटने के लिए अधिक क्षमता देता है।
आने वाले महीनों में चुनौती यह होगी कि विदेशी पूंजी प्रवाह कितना स्थायी रहता है और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां किस दिशा में जाती हैं।
फिलहाल, रिकॉर्ड भंडार भारत को एक मजबूत वित्तीय सुरक्षा कवच प्रदान करता है और वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की बाहरी स्थिरता को मजबूत करता है।
Source: Reserve Bank of India / Reuters / Business Standard / VoS News Desk
