भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 707 अरब डॉलर के पार पहुंचा

VoS NEWS DESK | अर्थव्यवस्था | 16 अगस्त 2026

भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, 7 अगस्त तक भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर लगभग 707.0 अरब डॉलर हो गया। इससे पहले यह 692.9 अरब डॉलर के आसपास था। एक सप्ताह में हुई 14.1 अरब डॉलर की वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों का रहा, जिनमें लगभग 9.9 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई।

आंकड़ों के मुताबिक विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां बढ़कर लगभग 574.6 अरब डॉलर हो गईं। भारत के सोने के भंडार में भी वृद्धि दर्ज की गई और यह लगभग 108.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से जुड़े विशेष आहरण अधिकार यानी SDR और रिजर्व ट्रेंच स्थिति में भी मामूली वृद्धि हुई।

विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार वृद्धि के पीछे कई नीतिगत उपायों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जून और जुलाई के दौरान विदेशी मुद्रा प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार की ओर से कई कदम उठाए गए। इनमें विदेशी मुद्रा जमा और बाहरी उधारी से संबंधित उपाय भी शामिल रहे। रिपोर्टों के अनुसार, जून से अब तक इन उपायों के माध्यम से 50 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा प्रवाह हुआ है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने मजबूत विदेशी मुद्रा प्रवाह को देखते हुए विदेशी मुद्रा जमा से जुड़ी एक विशेष स्वैप सुविधा को निर्धारित समय से पहले बंद करने का निर्णय भी लिया है। इसकी अंतिम तारीख अब 30 सितंबर के बजाय 31 अगस्त कर दी गई है।

भारत के लिए मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे देश को वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मुद्रा बाजार में दबाव का सामना करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है। यह आयात भुगतान और रुपये की स्थिरता बनाए रखने में भी सहायता करता है।

VoS STRATEGIC INSIGHT

विदेशी मुद्रा भंडार का 707 अरब डॉलर से ऊपर पहुंचना भारतीय अर्थव्यवस्था की बाहरी वित्तीय स्थिति के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। मजबूत भंडार वैश्विक बाजारों में अचानक आने वाले झटकों के खिलाफ भारत को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है।

हालांकि, केवल विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि को अर्थव्यवस्था की पूर्ण मजबूती का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। वैश्विक तेल कीमतें, पूंजी प्रवाह, रुपये की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार जैसे कारक आगे भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

यदि विदेशी पूंजी प्रवाह मजबूत बना रहता है और भारत अपनी बाहरी आर्थिक स्थिति को संतुलित रखता है, तो यह उच्च विदेशी मुद्रा भंडार देश की वित्तीय स्थिरता और निवेशकों के विश्वास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

स्रोत: VoS News Desk

क्या आपको यह लेख पसंद आया?

विशेष समाचार और दैनिक अपडेट प्राप्त करने के लिए सब्सक्राइब करें।

मुख्य पृष्ठ पर वापस