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'आर्थिक राष्ट्रवाद' का उदय: 2026 में वैश्विक व्यापार और सरकारी हस्तक्षेप का नया दौर
जियोपॉलिटिकल विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों ने 2026 को 'नए आर्थिक राष्ट्रवाद' (New Economic Nationalism) के उदय का वर्ष करार दिया है। लाज़र्ड (Lazard) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर की सरकारें अब केवल बाजारों की 'रेफरी' नहीं बल्कि मुख्य 'खिलाड़ी' बन गई हैं। अमेरिका द्वारा शुरू की गई औद्योगिक रणनीतियां, जिसमें महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सरकारी निवेश और हस्तक्षेप शामिल है, अब वैश्विक स्तर पर एक नया मानक बन रही हैं। यह प्रवृत्ति मुक्त व्यापार के पुराने युग को पीछे छोड़ते हुए एक ऐसे युग की शुरुआत कर रही है जहां राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता सबसे ऊपर है।
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर यूरोप और चीन के संबंधों पर देखा जा रहा है, जो अब 'टकराव की राह' पर हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) से लेकर पवन ऊर्जा और सौर पैनलों तक, चीन की बढ़ती औद्योगिक क्षमता और यूरोप की सुरक्षा चिंताओं के बीच तनाव गहरा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में और अधिक विखंडन लाएगी। व्यवसायों को अब एक ऐसे अस्थिर वातावरण के लिए तैयार रहना होगा जहां उन्हें अलग-अलग देशों की राजधानियों से मिलने वाली प्रतिस्पर्धी मांगों और बढ़ते विनियामक दबावों का सामना करना पड़ेगा।
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