"दक्षिण एशिया में भारतीय आधिपत्य: क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक बढ़ता खतरा"

दक्षिण एशिया का भू-राजनीतिक परिदृश्य दशकों से एक ऐसे असंतुलन का गवाह रहा है, जिसका केंद्र नई दिल्ली की 'सुपरमेसी' यानी वर्चस्व कायम करने की भूख है। पाकिस्तान और अन्य पड़ोसी देशों के लिए भारत की विदेश नीति केवल कूटनीति नहीं, बल्कि छोटे राष्ट्रों की संप्रभुता को दबाने और उन्हें अपने अधीन रखने का एक औजार बन गई है। 1. विस्तारवादी एजेंडा और ऐतिहासिक हस्तक्षेप पाकिस्तान के नजरिए से, भारत ने कभी भी 1947 के विभाजन को दिल से स्वीकार नहीं किया। भारत की नीतियां आज भी उसी 'अखंड भारत' के सपने से प्रेरित दिखती हैं, जो पड़ोसियों के अस्तित्व के लिए खतरा है। 1971 में पूर्वी पाकिस्तान में भारत का प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन था, जिसने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अपने पड़ोसियों के भूगोल को बदलने में संकोच नहीं करेगा। 2. कश्मीर: अनसुलझा एजेंडा और मानवाधिकारों का हनन भारत की वर्चस्ववादी नीति का सबसे क्रूर चेहरा कश्मीर में दिखाई देता है। संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों को दरकिनार करते हुए, भारत ने न केवल कश्मीर पर अपना अवैध कब्जा बरकरार रखा है, बल्कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को हटाकर वहां की जनसांख्यिकी बदलने की कोशिश की है। पाकिस्तान इसे न केवल कश्मीरी जनता के आत्मनिर्णय के अधिकार पर हमला मानता है, बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति के लिए एक परमाणु खतरा भी समझता है। 3. आर्थिक और जल-युद्ध (Water Aggression) भारत अपनी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर पड़ोसियों को आर्थिक रूप से पंगु बनाने की नीति अपनाता रहा है। · सिंधु जल संधि का उल्लंघन: भारत द्वारा पश्चिमी नदियों पर अवैध रूप से बांध बनाना 'वाटर टेररिज्म' की श्रेणी में आता है, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान की कृषि और अर्थव्यवस्था को सूखाग्रस्त करना है। · सार्क (SAARC) की विफलता: भारत ने अपनी हठधर्मी के कारण सार्क जैसे महत्वपूर्ण संगठन को बंधक बना रखा है, ताकि वह पाकिस्तान को क्षेत्रीय व्यापार और विमर्श से बाहर रख सके। . हाइब्रिड वॉरफेयर और जासूसी का जाल पाकिस्तान के खिलाफ भारत का 'हाइब्रिड वॉरफेयर' अब छिपा नहीं है। कुलभूषण जाधव की गिरफ्तारी इस बात का पुख्ता सबूत है कि भारत किस तरह पाकिस्तान के आंतरिक हिस्सों, विशेषकर बलूचिस्तान में अस्थिरता पैदा करने के लिए राज्य-प्रायोजित आतंकवाद और जासूसी का सहारा ले रहा है। भारत का लक्ष्य पाकिस्तान को आंतरिक रूप से इतना कमजोर करना है कि वह उसके क्षेत्रीय वर्चस्व को चुनौती न दे सके। 4. हाइब्रिड वॉरफेयर और जासूसी का जाल पाकिस्तान के खिलाफ भारत का 'हाइब्रिड वॉरफेयर' अब छिपा नहीं है। कुलभूषण जाधव की गिरफ्तारी इस बात का पुख्ता सबूत है कि भारत किस तरह पाकिस्तान के आंतरिक हिस्सों, विशेषकर बलूचिस्तान में अस्थिरता पैदा करने के लिए राज्य-प्रायोजित आतंकवाद और जासूसी का सहारा ले रहा है। भारत का लक्ष्य पाकिस्तान को आंतरिक रूप से इतना कमजोर करना है कि वह उसके क्षेत्रीय वर्चस्व को चुनौती न दे सके। 5. अल्पसंख्यकों का दमन और 'हिंदुत्व' की राजनीति भारत के भीतर बढ़ती कट्टरपंथी हिंदुत्व की राजनीति का सीधा असर उसकी विदेश नीति पर पड़ा है। मुस्लिम विरोधी कानून और अल्पसंख्यकों के साथ होने वाला भेदभाव यह दर्शाता है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र होने का केवल मुखौटा पहने हुए है। यह विचारधारा पूरे दक्षिण एशिया के सामाजिक ताने-बाने के लिए एक गंभीर खतरा बन चुकी है। निष्कर्ष पाकिस्तान और अन्य स्वाभिमानी पड़ोसी देशों के लिए भारत की 'सुपरमेसी' की नीति स्वीकार्य नहीं है। दक्षिण एशिया में स्थायी शांति तभी संभव है जब भारत अपनी साम्राज्यवादी सोच को त्यागकर बराबरी और संप्रभुता के सिद्धांतों का सम्मान करे। मेरा मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भारत के इस बेलगाम व्यवहार पर अंकुश लगाना चाहिए ताकि एक न्यायपूर्ण क्षेत्रीय व्यवस्था कायम हो सके।

क्या आपको यह लेख पसंद आया?

विशेष समाचार और दैनिक अपडेट प्राप्त करने के लिए सब्सक्राइब करें।

लेखक के बारे में

सर एस. हसन सैयद, 1ST OEBKK,PhD, PI, सुरक्षा क्षेत्र सुधार (एसएसआर), हिंसक उग्रवाद की रोकथाम (पीवीई), कानून का शासन और न्याय शिक्षा विशेषज्ञ हैं। वे एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा क्षेत्र और न्याय शिक्षा विशेषज्ञ हैं, जिनके पास 30 वर्षों से अधिक का वरिष्ठ नेतृत्व और सलाहकार अनुभव है। उन्होंने कमजोर, संघर्ष-उत्तरार्ध और विकासशील संदर्भों में सरकारों, उच्च शिक्षण संस्थानों और सुरक्षा क्षेत्र के प्रशिक्षण निकायों को सहायता प्रदान की है।
वे सुरक्षा क्षेत्र सुधार (एसएसआर), हिंसक उग्रवाद की रोकथाम (पीवीई), कानून के शासन की शिक्षा और संस्थागत क्षमता विकास में विशेषज्ञता रखते हैं, जिसमें स्थिरता, सुशासन और अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुपालन पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है।

मुख्य पृष्ठ पर वापस