समाज, शिक्षा और मीडिया: भारत की सामाजिक संरचना में बदलाव, डिजिटल खाई और सूचना क्रांति

21वीं सदी के भारत में समाज, शिक्षा और मीडिया के बीच का संबंध एक अभूतपूर्व बदलाव के दौर से गुजर रहा है। डिजिटल तकनीक के प्रसार ने ज्ञान तक पहुँच को सुलभ बनाया है, लेकिन इसके साथ ही सामाजिक-आर्थिक विषमताएँ, बुनियादी शिक्षा के स्तर में गिरावट और सूचना की विश्वसनीयता जैसी नई चुनौतियाँ भी पैदा हुई हैं।

शिक्षा का परिदृश्य: साक्षरता दर में वृद्धि और बुनियादी दक्षताओं का संकट

भारत में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार हुआ है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता और समानता एक गंभीर चिंता बनी हुई है।

  • साक्षरता दर: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के आंकड़ों के अनुसार, भारत की औसत साक्षरता दर बढ़कर लगभग 77.7% हो गई है। शहरी क्षेत्रों में यह 87.7% है, जबकि ग्रामीण भारत में साक्षरता दर 73.5% पर बनी हुई है।

  • लैंगिक अंतर: पुरुषों की साक्षरता दर (84.7%) की तुलना में महिलाओं की साक्षरता दर (70.3%) में 14.4% का अंतर बना हुआ है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक स्पष्ट है।

  • बुनियादी सीखने का संकट: प्रथम (Pratham) संस्था की वार्षिक शिक्षा रिपोर्ट (ASER) के अनुसार, सरकारी स्कूलों में कक्षा 5 के लगभग 50% बच्चे कक्षा 2 के स्तर की पाठ्यपुस्तकें पढ़ने में सक्षम नहीं हैं।

  • ड्रॉपआउट दर: उच्च प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर कुल नामांकन अनुपात (GER) में सुधार हुआ है, लेकिन 15 से 18 वर्ष की आयु वर्ग के 15% से अधिक बच्चे औपचारिक शिक्षा प्रणाली से बाहर हो जाते हैं।

डिजिटल विभाजन: शिक्षा और सामाजिक अवसर

कोरोना महामारी के बाद ऑनलाइन शिक्षा पर निर्भरता बढ़ी, जिसने देश के डिजिटल विभाजन को उजागर किया।

  • इंटरनेट की पहुँच: भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 800 मिलियन (80 करोड़) से अधिक हो चुकी है, लेकिन इनमें से 60% से अधिक उपयोगकर्ता शहरी क्षेत्रों तक सीमित हैं।

  • उपकरणों की उपलब्धता: ग्रामीण भारत के केवल 24% परिवारों के पास शिक्षण के लिए डिजिटल उपकरणों (कंप्यूटर, लैपटॉप या स्मार्टफोन) तक पहुँच है, जिससे वंचित वर्ग के बच्चों के लिए शिक्षा का अंतर और गहरा हुआ है।

मीडिया परिदृश्य का बदलाव: पारंपरिक टीवी से डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म की ओर

सूचना के उपयोग और जनमत निर्माण में मीडिया की भूमिका पूरी तरह से बदल चुकी है। पारंपरिक समाचार पत्रों और केबल टीवी के बजाय डिजिटल मीडिया भारत का प्राथमिक सूचना स्रोत बन रहा है।

  • सोशल मीडिया उपयोगकर्ता: भारत में व्हाट्सएप के 530 मिलियन, यूट्यूब के 460 मिलियन, इंस्टाग्राम के 360 मिलियन और फेसबुक के 310 मिलियन से अधिक सक्रिय उपयोगकर्ता हैं।

  • युवाओं में मीडिया का उपयोग: 18 से 35 वर्ष के लगभग 70% युवा दैनिक समाचारों और सूचनाओं के लिए यूट्यूब, शॉर्ट-फॉर्म वीडियो (रील्स/शॉर्ट्स) और स्वतंत्र पॉडकास्ट का उपयोग करते हैं।

  • पारंपरिक मीडिया पर दबाव: टेलीविजन विज्ञापनों और प्रिंट मीडिया के राजस्व में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि डिजिटल विज्ञापन बाजार में सालाना 20% से अधिक की वृद्धि हो रही है।

सामाजिक चुनौतियाँ: फेक न्यूज और मानसिक स्वास्थ्य

मीडिया के अनियंत्रित प्रसार ने समाज पर गहरे दुष्प्रभाव भी डाले हैं:

  • भ्रामक सूचनाएँ (Misinformation): सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर फ़ेक न्यूज़ और अभद्र भाषा का तेज़ी से प्रसार सामाजिक ध्रुवीकरण का कारण बन रहा है। साइबर क्राइम रिपोर्ट के अनुसार, ऑनलाइन धोखाधड़ी और हेट स्पीच के मामलों में सालाना 18% की वृद्धि हुई है।

  • मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव: 14 से 24 वर्ष के युवाओं में अत्यधिक स्क्रीन टाइम (औसतन 4.5 घंटे प्रतिदिन) के कारण चिंता, अवसाद और एकाग्रता की कमी जैसी समस्याएँ तेजी से बढ़ी हैं।

समाधान की दिशा

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान (FLN) को प्राथमिकता देना और स्कूलों में मीडिया साक्षरता (Media Literacy) को शामिल करना समय की आवश्यकता है। समाज, शिक्षा और मीडिया के संतुलित एकीकरण से ही एक जागरूक, समावेशी और डिजिटल रूप से सशक्त भारत का निर्माण संभव है।

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