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वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका के नीचे खोजी विशाल 'थर्मल विसंगति', बर्फ पिघलने की दर में 50% वृद्धि की आशंका
अंटार्कटिका के बर्फीले महाद्वीप से आज एक डरावनी वैज्ञानिक रिपोर्ट सामने आई है। डीप-सी रोबोट्स ने अंटार्कटिका की बर्फ की परतों के नीचे पानी की एक विशाल 'थर्मल विसंगति' (Thermal Anomaly) का पता लगाया है। डेटा से पता चलता है कि समुद्र की गहराइयों में फंसी गर्मी अब सीधे उन ग्लेशियरों की नींव को निशाना बना रही है जो अब तक स्थिर माने जाते थे। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस गर्मी के कारण बर्फ पिघलने की वर्तमान दर अगले दो वर्षों में 50% तक बढ़ सकती है, जिससे वैश्विक समुद्र स्तर में तेजी से वृद्धि होगी।
यह खोज वैश्विक जलवायु संकट की गंभीरता को एक नए स्तर पर ले गई है। अब तक यह माना जाता था कि केवल वायुमंडलीय गर्मी ही बर्फ को पिघला रही है, लेकिन यह नई रिपोर्ट साबित करती है कि समुद्र की गहराइयां भी अब अंटार्कटिका के अस्तित्व के लिए खतरा बन गई हैं। अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान दल अब बर्फ के नीचे और अधिक सेंसर लगाने की तैयारी कर रहे हैं ताकि इस थर्मल लहर के मार्ग को ट्रैक किया जा सके। दुनिया भर के तटीय शहरों के लिए यह रिपोर्ट एक अंतिम चेतावनी के रूप में देखी जा रही है, जो भविष्य के आपदा प्रबंधन के लिए तत्काल बदलाव की मांग करती है।
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