VoS NEWS DESK | शिक्षा
नई दिल्ली में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के विजेताओं के साथ बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों से कहा कि वे छात्रों की पढ़ाई के साथ-साथ उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और व्यवहार पर भी नजर रखें। उन्होंने विशेष रूप से अत्यधिक मोबाइल और स्क्रीन इस्तेमाल को बच्चों के विकास के लिए एक बढ़ती चुनौती बताया।
प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे अभिभावकों के साथ बातचीत कर बच्चों के स्क्रीन इस्तेमाल पर ध्यान दें, खासकर रात में मोबाइल फोन के अधिक उपयोग को लेकर। उन्होंने कहा कि बच्चों को स्क्रीन से दूर करने के लिए खेलकूद, शारीरिक गतिविधियों और रचनात्मक कार्यों की ओर प्रोत्साहित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि बच्चों का विकास केवल परीक्षा के अंकों से नहीं मापा जाना चाहिए। प्रत्येक छात्र की अपनी क्षमता, रुचि और प्रतिभा होती है और शिक्षक की भूमिका उस प्रतिभा को पहचानने तथा उसे सही दिशा देने में महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री ने शिक्षकों को शैक्षणिक संस्थानों में नशे के प्रति जागरूकता बढ़ाने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को छात्रों के व्यवहार में अचानक होने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए और यदि किसी बच्चे में डर, तनाव या अन्य असामान्य संकेत दिखाई दें तो उसकी स्थिति को समझने का प्रयास करना चाहिए।
मोदी ने शिक्षा को केवल किताबों और निर्धारित पाठ्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय बच्चों के वास्तविक जीवन से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे छात्रों की जिज्ञासा को बनाए रखें और उन्हें खेल, रचनात्मक गतिविधियों तथा वास्तविक दुनिया के अनुभवों से सीखने के अवसर दें।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए कुल 82 शिक्षकों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रशिक्षकों का चयन किया गया है। इनमें स्कूल शिक्षा से 48 शिक्षक, उच्च शिक्षा और पॉलीटेक्निक संस्थानों से 21 शिक्षक/फैकल्टी सदस्य तथा कौशल विकास क्षेत्र से 13 प्रशिक्षक शामिल हैं।
शिक्षा के बदलते डिजिटल दौर में प्रधानमंत्री का संदेश इस बात की ओर भी संकेत करता है कि तकनीक को शिक्षा का हिस्सा बनाया जा सकता है, लेकिन बच्चों के सामाजिक, शारीरिक और रचनात्मक विकास की कीमत पर नहीं।
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भारत की शिक्षा व्यवस्था के सामने अब चुनौती केवल बेहतर अंक और परीक्षा परिणाम हासिल करना नहीं है। डिजिटल उपकरणों और ऑनलाइन मनोरंजन की बढ़ती पहुंच ने बच्चों के सीखने और जीवनशैली दोनों को बदल दिया है।
स्क्रीन का नियंत्रित और उद्देश्यपूर्ण इस्तेमाल शिक्षा के लिए उपयोगी हो सकता है, लेकिन अत्यधिक निर्भरता बच्चों की शारीरिक गतिविधियों, सामाजिक संपर्क और रचनात्मक समय को प्रभावित कर सकती है। इसी तरह नशे जैसी समस्याओं से निपटने के लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी; स्कूल, शिक्षक और परिवार तीनों की सक्रिय भूमिका जरूरी होगी।
भविष्य की शिक्षा व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही होगा कि बच्चे तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं या तकनीक बच्चों के व्यवहार और समय को नियंत्रित कर रही है। शिक्षक इस संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
Source: Indian Express / India Today / NDTV / VoS News Desk
