VoS NEWS DESK | छात्रों को मिलेगी अधिक पारदर्शिता
CIC ने CBSE की उस व्यवस्था पर भी आपत्ति जताई है, जिसके तहत RTI के जरिए उत्तर-पुस्तिका प्राप्त करने के बाद छात्र सत्यापन या पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन नहीं कर सकते थे। आयोग ने कहा कि CBSE की आंतरिक प्रक्रिया RTI कानून के अधिकारों को सीमित नहीं कर सकती।
मामले में यह भी सामने आया कि CBSE की सामान्य प्रक्रिया के तहत छात्रों को उत्तर-पुस्तिकाओं की कॉपी, सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए काफी अधिक राशि खर्च करनी पड़ सकती थी। CIC ने स्पष्ट किया कि RTI के तहत मांगी गई उत्तर-पुस्तिका के लिए शुल्क RTI नियमों के अनुरूप होना चाहिए।
आयोग ने CBSE से अपनी संबंधित नीतियों और सर्कुलर की समीक्षा करने को भी कहा है, ताकि उत्तर-पुस्तिकाओं तक छात्रों की पहुंच और पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया RTI कानून के अनुरूप हो सके। इससे परीक्षा मूल्यांकन को लेकर छात्रों के बीच पारदर्शिता और भरोसा बढ़ने की उम्मीद है।
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यह फैसला केवल फीस से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि छात्रों के सूचना के अधिकार और परीक्षा प्रणाली की जवाबदेही से भी जुड़ा है। यदि विद्यार्थी अपनी मूल्यांकित कॉपी देख सकें और जरूरत पड़ने पर मूल्यांकन पर सवाल उठा सकें, तो इससे परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता मजबूत हो सकती है।
CBSE से अब अपनी प्रक्रियाओं को RTI नियमों के अनुरूप स्पष्ट करने और छात्रों के लिए अधिक सरल व्यवस्था सुनिश्चित करने की उम्मीद है। यह फैसला भविष्य में अन्य शिक्षा बोर्डों की मूल्यांकन और पुनर्मूल्यांकन नीतियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन सकता है।
क्या CIC का यह फैसला CBSE की उत्तर-पुस्तिका और पुनर्मूल्यांकन व्यवस्था में स्थायी बदलाव की शुरुआत करेगा?
Source: Indian Express • Times of India • CIC • VoS News Desk.
