. प्रज्ञान ओझा बने भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता, रमेश पोवार को भी चयन समिति में मिली जगह

. प्रज्ञान ओझा बने भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता, रमेश पोवार को भी चयन समिति में मिली जगह

VoS NEWS DESK | SPORTS | 20 OCTOBER 2026

भारतीय क्रिकेट में राष्ट्रीय चयनकर्ता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि चयन समिति ही विभिन्न प्रारूपों के लिए टीमों के चयन, खिलाड़ियों के प्रदर्शन के मूल्यांकन और भविष्य की टीम रणनीति से जुड़े फैसलों में अहम योगदान देती है। प्रज्ञान ओझा की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारतीय क्रिकेट को आने वाले अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों और 2027 के एकदिवसीय विश्व कप को ध्यान में रखते हुए खिलाड़ियों की उपलब्धता, प्रदर्शन और टीम संयोजन पर लगातार विचार करना होगा।

प्रज्ञान ओझा भारतीय क्रिकेट के अनुभवी बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाजों में शामिल रहे हैं। उन्होंने भारत के लिए 24 टेस्ट, 18 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय और छह टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनके अनुभव और चयन समिति में पहले से मौजूद भूमिका के आधार पर उन्हें समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, वह पहले अंतरिम अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

ओझा का मुख्य चयनकर्ता बनना भारतीय टीम के चयन संबंधी फैसलों में निरंतरता बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। चयन समिति को खिलाड़ियों के मौजूदा फॉर्म, फिटनेस, घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव का सामना करने की क्षमता जैसे विभिन्न पहलुओं पर विचार करना पड़ता है। किसी खिलाड़ी का चयन केवल उसके पिछले रिकॉर्ड के आधार पर नहीं किया जा सकता; टीम की जरूरतों, विरोधी टीम की ताकत और आगामी प्रतियोगिताओं की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना होता है।

रमेश पोवार की चयन समिति में नियुक्ति भी इस बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पूर्व भारतीय ऑफ-स्पिन गेंदबाज पोवार ने भारत के लिए दो टेस्ट और 31 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। क्रिकेट से संन्यास के बाद उन्होंने कोचिंग के क्षेत्र में भी काम किया और भारतीय महिला क्रिकेट टीम के मुख्य कोच सहित मुंबई और गुजरात की टीमों के साथ जिम्मेदारियां निभाईं। वह BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में गेंदबाजी कोच के रूप में भी काम कर चुके हैं।

पोवार का कोचिंग अनुभव चयन समिति के काम में उपयोगी हो सकता है, क्योंकि खिलाड़ियों के प्रदर्शन का आकलन करते समय तकनीकी कौशल, रणनीतिक समझ और मैच की परिस्थितियों के अनुसार बदलाव करने की क्षमता पर भी ध्यान देना पड़ता है। हालांकि, चयन समिति में नियुक्ति का अर्थ यह नहीं है कि किसी विशेष खिलाड़ी को टीम में शामिल करने या हटाने का फैसला पहले से तय है। खिलाड़ियों के चयन से जुड़े निर्णय सामूहिक मूल्यांकन और टीम की आवश्यकताओं के आधार पर लिए जाते हैं।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अनुसार, रमेश पोवार के चयन के लिए क्रिकेट सलाहकार समिति ने प्रक्रिया पूरी की। इस समिति में अशोक मल्होत्रा और जतिन परांजपे शामिल थे। समिति ने उम्मीदवारों की समीक्षा और साक्षात्कार के बाद पोवार के नाम की सर्वसम्मति से सिफारिश की। इसके बाद बोर्ड ने उनकी नियुक्ति की घोषणा की।

अजित अगरकर के कार्यकाल के समाप्त होने के बाद चयन समिति में यह बदलाव हुआ है। अगरकर जुलाई 2023 में मुख्य चयनकर्ता बने थे। उनके कार्यकाल में भारतीय पुरुष टीम ने कई बड़ी प्रतियोगिताओं में सफलता हासिल की, जिनमें 2024 का टी20 विश्व कप और 2025 की चैंपियंस ट्रॉफी शामिल हैं। बोर्ड ने उनके योगदान को भी स्वीकार किया है। अगरकर ने अपने कार्यकाल के विस्तार की मांग नहीं की, जिसके बाद नए अध्यक्ष और समिति सदस्य के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

नई चयन समिति के सामने सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक अलग-अलग प्रारूपों के लिए संतुलित टीम तैयार करना होगा। टेस्ट क्रिकेट में धैर्य, तकनीकी क्षमता और लंबे समय तक प्रदर्शन बनाए रखने की जरूरत होती है, जबकि एकदिवसीय और टी20 क्रिकेट में खिलाड़ियों की भूमिका और रणनीति अलग हो सकती है। ऐसे में चयनकर्ताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि खिलाड़ियों का चुनाव प्रत्येक प्रारूप की आवश्यकताओं के अनुसार किया जाए।

2027 के एकदिवसीय विश्व कप की तैयारी भी भारतीय क्रिकेट के लिए महत्वपूर्ण होगी। बड़े टूर्नामेंट से पहले खिलाड़ियों को पर्याप्त अवसर देना, टीम संयोजन को मजबूत बनाना और चोटों के जोखिम को ध्यान में रखते हुए कार्यभार का प्रबंधन करना आवश्यक होता है। चयनकर्ताओं को अनुभवी खिलाड़ियों और उभरती प्रतिभाओं के बीच संतुलन बनाने के साथ-साथ ऐसे खिलाड़ियों की पहचान भी करनी होगी जो दबाव की परिस्थितियों में टीम के लिए योगदान दे सकें।

घरेलू क्रिकेट भी चयन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार बना रहेगा। रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे ट्रॉफी और अन्य घरेलू प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने का अवसर मिल सकता है। मजबूत घरेलू क्रिकेट व्यवस्था भारतीय टीम को नए बल्लेबाज, गेंदबाज और ऑलराउंडर उपलब्ध कराने में मदद करती है। इसलिए चयन समिति के लिए केवल अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू स्तर पर खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भी लगातार नजर रखना जरूरी होगा।

इसके अतिरिक्त, खिलाड़ियों की फिटनेस और उपलब्धता से जुड़े फैसले भी महत्वपूर्ण होंगे। अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर व्यस्त होने के कारण कई खिलाड़ी अलग-अलग प्रारूपों में लगातार खेलते हैं। चयनकर्ताओं को टीम प्रबंधन और मेडिकल स्टाफ के साथ तालमेल रखते हुए यह देखना होगा कि खिलाड़ी कब खेलने के लिए तैयार हैं और किन परिस्थितियों में उन्हें आराम देना उचित हो सकता है।

प्रज्ञान ओझा और रमेश पोवार की नियुक्तियों के बाद क्रिकेट प्रशंसकों की नजर इस बात पर रहेगी कि नई समिति आगामी श्रृंखलाओं के लिए किस प्रकार टीम चुनती है। चयनकर्ताओं के फैसलों पर अक्सर सार्वजनिक चर्चा होती है, खासकर तब जब किसी अनुभवी खिलाड़ी को टीम से बाहर रखा जाता है या किसी नए खिलाड़ी को मौका दिया जाता है। ऐसे मामलों में चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता, प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन और स्पष्ट भूमिका निर्धारण महत्वपूर्ण रहते हैं।

फिलहाल, नई नियुक्तियों का सबसे बड़ा महत्व यह है कि भारतीय पुरुष क्रिकेट की चयन समिति को नया नेतृत्व और एक नया सदस्य मिला है। इन नियुक्तियों के वास्तविक प्रभाव का आकलन आने वाले महीनों में टीम चयन, खिलाड़ियों को दिए जाने वाले अवसरों और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारियों के आधार पर किया जा सकेगा।

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प्रज्ञान ओझा और रमेश पोवार की नियुक्तियां भारतीय क्रिकेट की चयन व्यवस्था में अनुभव और निरंतरता को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव हैं। दोनों पूर्व खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की चुनौतियों से परिचित हैं और पोवार को कोचिंग का अनुभव भी प्राप्त है। हालांकि, चयन समिति की सफलता केवल नियुक्त व्यक्तियों के क्रिकेट रिकॉर्ड पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करेगी कि वे खिलाड़ियों का मूल्यांकन कितनी निष्पक्षता, स्पष्टता और दीर्घकालिक योजना के साथ करते हैं।

आगामी विश्व कप और अंतरराष्ट्रीय श्रृंखलाओं को ध्यान में रखते हुए चयनकर्ताओं के लिए अनुभवी खिलाड़ियों और नई प्रतिभाओं के बीच संतुलन बनाना जरूरी होगा। घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को उचित अवसर देना और टीम में प्रत्येक खिलाड़ी की भूमिका स्पष्ट रखना प्रतिस्पर्धी टीम बनाने में मदद कर सकता है।

भारतीय क्रिकेट में प्रशंसकों की अपेक्षाएं हमेशा ऊंची रहती हैं। इसलिए चयन समिति को तत्काल परिणामों के साथ-साथ भविष्य की टीम तैयार करने पर भी ध्यान देना होगा। खिलाड़ियों की फिटनेस, कार्यभार और विभिन्न प्रारूपों की जरूरतों को ध्यान में रखकर लिए गए फैसले आने वाले समय में भारतीय टीम की तैयारी को प्रभावित करेंगे।

स्रोत: The Indian Express; India Today.

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