दिल्ली हवाई अड्डे के टर्मिनल-3 का होगा नया रूप, भारतीय विरासत से प्रेरित रंगीन कालीनों से सजेगा प्रस्थान क्षेत्र

दिल्ली हवाई अड्डे के टर्मिनल-3 का होगा नया रूप, भारतीय विरासत से प्रेरित रंगीन कालीनों से सजेगा प्रस्थान क्षेत्र

VoS NEWS DESK | राष्ट्रीय समाचार और यात्रा | 28 अक्टूबर 2026

दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा देश के सबसे व्यस्त विमानन केंद्रों में शामिल है। यहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्री यात्रा करते हैं। टर्मिनल-3 का प्रस्थान क्षेत्र यात्रियों के लिए चेक-इन, सुरक्षा जांच और बोर्डिंग गेट तक पहुंचने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में इस क्षेत्र का डिजाइन, साफ-सफाई और सुविधाएं यात्रियों के समग्र अनुभव को प्रभावित करती हैं।

हिंदुस्तान टाइम्स की 28 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, टर्मिनल-3 के प्रस्थान क्षेत्र में लगभग 40,000 वर्ग मीटर कालीन बदले जाने हैं। नए कालीनों में टेराकोटा, जंगिया लाल, गेरुआ और नारंगी जैसे रंग प्रमुख होंगे। इन रंगों का चयन भारतीय कला और शिल्प की विविधता से प्रेरित डिजाइन को आधुनिक हवाई अड्डे के वातावरण के साथ जोड़ने के लिए किया गया है।

परियोजना की डिजाइन अवधारणा “Flow of Indian Heritage — A Journey in Colour” भारतीय सांस्कृतिक विरासत को समकालीन रूप में प्रस्तुत करने पर केंद्रित है। अधिकारियों के अनुसार, कतारों वाले क्षेत्रों में घने और रंगीन पैटर्न यात्रियों के प्रतीक्षा अनुभव को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे। बोर्डिंग गेटों की ओर बढ़ते क्षेत्र में डिजाइन धीरे-धीरे बदलता रहेगा, जिससे पूरे लंबे गलियारे में दृश्य निरंतरता बनी रहेगी।

डिजाइन में रंगों का इस्तेमाल केवल सजावट तक सीमित नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, गलियारे के अंतिम हिस्सों में अधिक केंद्रित रंग यात्रियों की नजर को आकर्षित करने वाले दृश्य बिंदु बनाएंगे। इससे लंबे और एक जैसे दिखने वाले प्रतीक्षा क्षेत्रों में एकरसता कम करने में मदद मिल सकती है। रंगीन पैटर्न के साथ धूसर रंग की आधार सतह भी रखी जाएगी, जिससे सामान्य धूल और हल्की गंदगी कम स्पष्ट दिखाई दे सके।

टर्मिनल-3 में कालीनों का इस्तेमाल नया नहीं है। वर्ष 2010 में जब यह टर्मिनल शुरू हुआ था, तब इसके यात्री क्षेत्रों में कालीन प्रमुख डिजाइन तत्वों में शामिल थे। वर्ष 2018 में दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) ने कुछ हिस्सों में कालीन हटाकर कठोर फर्श लगाने की प्रक्रिया भी शुरू की थी। अब नए कालीनों की योजना के जरिए प्रस्थान क्षेत्र को फिर से नया रूप देने का प्रयास किया जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, कालीन बदलने का काम इस वर्ष जून में शुरू हुआ था और इसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। परियोजना का पहला चरण जारी है। चरणों में काम करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यात्रियों की आवाजाही, बोर्डिंग और अन्य हवाई अड्डा गतिविधियां बाधित न हों। चूंकि टर्मिनल-3 में लगातार यात्रियों की आवाजाही होती रहती है, इसलिए काम के दौरान क्षेत्रों को व्यवस्थित ढंग से संभालना महत्वपूर्ण है।

दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने इस परियोजना को नियमित रखरखाव का हिस्सा बताया है। कंपनी के अनुसार, पुराने कालीनों में सामान्य उपयोग के कारण होने वाली टूट-फूट और घिसावट को देखते हुए उन्हें बदला जा रहा है। नए कालीनों में मौजूदा सामग्री, टिकाऊपन और रखरखाव संबंधी मानकों को बनाए रखने की योजना है। इसका अर्थ है कि परियोजना का उद्देश्य केवल दृश्य बदलाव करना नहीं, बल्कि मौजूदा गुणवत्ता मानकों के भीतर टर्मिनल के स्वरूप को ताजा करना भी है।

हवाई अड्डे के डिजाइन में यात्रियों की सुविधा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बड़े टर्मिनलों में यात्रियों को लंबी दूरी तक चलना पड़ सकता है और कई बार उन्हें बोर्डिंग गेट के पास लंबे समय तक प्रतीक्षा करनी होती है। ऐसे वातावरण में रंगों और पैटर्न का संतुलित इस्तेमाल स्थान को अधिक पहचानने योग्य और आकर्षक बना सकता है। हालांकि, डिजाइन के साथ-साथ संकेतक, साफ-सफाई, बैठने की जगह और सुगम आवाजाही जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण रहती हैं।

टर्मिनल में काम को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने से यात्रियों को होने वाली परेशानी कम करने में मदद मिल सकती है। अधिकारियों ने बताया है कि परियोजना इस तरह आगे बढ़ाई जा रही है कि सामान्य संचालन जारी रह सके। इसके बावजूद, यात्रियों को यात्रा के दौरान हवाई अड्डे के संकेतकों और कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करना चाहिए, खासकर उन क्षेत्रों में जहां रखरखाव का काम चल रहा हो।

भारतीय विरासत से प्रेरित डिजाइन का इस्तेमाल देश की सांस्कृतिक विविधता को आधुनिक सार्वजनिक स्थानों में प्रस्तुत करने का एक तरीका भी है। हस्तशिल्प, पारंपरिक रंग संयोजन और दृश्य पैटर्न भारतीय कला की विभिन्न परंपराओं से प्रेरणा लेते हैं। ऐसे डिजाइन अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को भारत की सांस्कृतिक पहचान का एक दृश्य परिचय दे सकते हैं, हालांकि परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य टर्मिनल के उपयोग में आने वाले क्षेत्र को बेहतर बनाना है।

हवाई अड्डे जैसे बड़े सार्वजनिक स्थानों में डिजाइन और रखरखाव के बीच संतुलन बनाना आवश्यक होता है। कालीनों को लगातार यात्रियों के दबाव, ट्रॉली की आवाजाही, सफाई और सामान्य टूट-फूट का सामना करना पड़ता है। इसलिए उनकी सामग्री और रखरखाव संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए डिजाइन चुनना महत्वपूर्ण है। DIAL के अनुसार, नए कालीन मौजूदा सामग्री और टिकाऊपन के मानकों को बनाए रखेंगे।

इस परियोजना का प्रभाव यात्रियों को तब स्पष्ट रूप से दिखाई देगा जब प्रस्थान क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में नए कालीन लगाए जाएंगे। रंगों का नया संयोजन टर्मिनल की दृश्य पहचान में बदलाव ला सकता है, जबकि चरणबद्ध कार्य योजना के कारण यात्रियों को सामान्य संचालन में कम से कम बाधा होने की उम्मीद है।

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दिल्ली हवाई अड्डे के टर्मिनल-3 में प्रस्तावित बदलाव दिखाता है कि बड़े परिवहन केंद्रों में डिजाइन, रखरखाव और सांस्कृतिक पहचान को एक साथ महत्व दिया जा सकता है। भारतीय विरासत से प्रेरित रंगीन कालीन प्रस्थान क्षेत्र को नया रूप दे सकते हैं, लेकिन परियोजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नए डिजाइन के साथ टिकाऊपन, सफाई और यात्रियों की आवाजाही के मानक भी बने रहें। सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में छोटे दिखने वाले सुधार भी लाखों यात्रियों के अनुभव को प्रभावित कर सकते हैं।

Source: Hindustan Times; Delhi International Airport Limited.

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