VoS NEWS DESK | ENVIRONMENT | 22 अक्टूबर 2026
मांडोवी नदी गोवा की प्रमुख नदियों में से एक है और राज्य की राजधानी पणजी के आसपास के क्षेत्र में इसका सामाजिक, पर्यावरणीय और आर्थिक महत्व है। नदी से जुड़े जलमार्ग, पर्यटन गतिविधियां, स्थानीय व्यापार और मछली पकड़ने वाले समुदाय इस जल क्षेत्र से किसी न किसी रूप में जुड़े हुए हैं। ऐसे में नदी के पानी में प्रदूषण का सामने आना पर्यावरण संरक्षण और जल गुणवत्ता की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।
गोवा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अंतरिम रिपोर्ट के अनुसार, नदी के सभी 22 नमूना स्थलों पर फीकल कोलीफॉर्म का स्तर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निर्धारित सीमा से अधिक था। उच्च ज्वार के दौरान दर्ज स्तर 130 से 540 MPN प्रति 100 मिलीलीटर के बीच रहा, जबकि निम्न ज्वार के दौरान यह 130 से 940 MPN प्रति 100 मिलीलीटर तक पहुंच गया। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि निम्न ज्वार के दौरान कुछ स्थानों पर प्रदूषण का स्तर अधिक था।
फीकल कोलीफॉर्म ऐसे सूक्ष्मजीवों का समूह है, जिनकी मौजूदगी पानी में मानव या पशु अपशिष्ट से होने वाले संभावित प्रदूषण का संकेत दे सकती है। इनकी अधिक मात्रा मिलने पर जल की स्वच्छता को लेकर चिंता बढ़ती है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां लोग पानी के संपर्क में आते हैं या उसका उपयोग विभिन्न गतिविधियों के लिए करते हैं। हालांकि, केवल इस संकेतक के आधार पर किसी विशेष बीमारी के फैलने या प्रदूषण के एक निश्चित स्रोत की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए अतिरिक्त परीक्षण और जांच आवश्यक होती है।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रदूषण का वास्तविक स्रोत अभी स्थापित नहीं हुआ है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने संभावित स्रोतों की पहचान और अपशिष्ट जल के प्रवेश के रास्तों का पता लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। पणजी के किनारे स्थित कुछ नालों और जलमार्गों, जिनमें रियो डी ओरेम, शहर के बाजार की जल निकासी व्यवस्था और सांता इनेज़ क्रीक या नहर का उल्लेख किया गया है, को संभावित गैर-बिंदु प्रदूषण स्रोतों के संदर्भ में देखा जा रहा है। नदी के दूसरी ओर बेटिम क्षेत्र के मछली बाजार, मछली पकड़ने के जेटी और मौसमी जल निकासी मार्गों की भी जांच की आवश्यकता बताई गई है। इन स्थानों को संभावित स्रोतों के रूप में देखा जा रहा है; अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
इस मामले में न्यायिक निगरानी भी महत्वपूर्ण हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, मांडोवी नदी से जुड़े जल निकायों और आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण संबंधी चिंताओं के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले पर संज्ञान लिया था। इससे पहले अप्रैल 2026 में माला झील में बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां तैरती हुई मिलने की घटना ने भी जल प्रदूषण और जल निकायों के रखरखाव को लेकर चिंता पैदा की थी। इसके बाद नदी और उससे जुड़े जल क्षेत्रों की गुणवत्ता की जांच का मुद्दा सामने आया।
जल प्रदूषण के स्रोत की पहचान करना समस्या के स्थायी समाधान के लिए आवश्यक है। यदि बिना पर्याप्त उपचार के घरेलू सीवेज या अन्य अपशिष्ट जल नदी में पहुंचता है, तो प्रदूषण नियंत्रण के लिए जल निकासी व्यवस्था, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों की समीक्षा करनी पड़ सकती है। इसके साथ ही, बारिश के पानी के साथ बहकर आने वाले प्रदूषकों और विभिन्न छोटे नालों से नदी में पहुंचने वाले अपशिष्ट की भी जांच करनी होगी।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि नदी के पानी के कुछ अन्य मानक, जैसे पीएच स्तर, गंदलापन, घुलित ऑक्सीजन, जैविक ऑक्सीजन मांग और नाइट्रेट तथा नाइट्राइट की मौजूदगी, निर्धारित सीमा के भीतर पाए गए। हालांकि, कुछ मानकों का सामान्य स्तर फीकल कोलीफॉर्म की अधिक मात्रा को अप्रासंगिक नहीं बनाता। जल की समग्र गुणवत्ता का आकलन कई मानकों और उनके संयुक्त प्रभाव के आधार पर किया जाता है।
मांडोवी नदी पर निर्भर समुदायों के लिए स्वच्छ जल का महत्व विशेष रूप से अधिक है। नदी से जुड़े पर्यटन, नाव संचालन और मछली पकड़ने जैसी गतिविधियों पर जल की गुणवत्ता का प्रभाव पड़ सकता है। यदि प्रदूषण की समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो इससे पर्यावरणीय संतुलन और नदी के प्रति लोगों के भरोसे पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, आर्थिक प्रभावों का आकलन करने के लिए अलग से आंकड़ों और स्थानीय परिस्थितियों का अध्ययन आवश्यक होगा।
प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए नियमित नमूना परीक्षण, संभावित स्रोतों की पहचान और जिम्मेदार संस्थाओं के बीच समन्वय जरूरी है। स्थानीय प्रशासन, नगर निकायों और प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि अपशिष्ट जल का उचित उपचार हो और जल निकासी प्रणालियों की निगरानी प्रभावी ढंग से की जाए। नागरिकों की भागीदारी भी उपयोगी हो सकती है, विशेष रूप से कचरे को नालों में डालने से रोकने और स्थानीय जल निकायों की स्वच्छता बनाए रखने में।
अंतरिम रिपोर्ट ने समस्या की गंभीरता को सामने रखा है, लेकिन प्रदूषण का सटीक स्रोत और उसे नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे। इसलिए आगे की कार्रवाई में नमूना परीक्षणों को दोहराना, संभावित अपशिष्ट स्रोतों की जांच करना और सुधारात्मक उपायों के परिणामों की नियमित समीक्षा करना महत्वपूर्ण होगा।
VoS STRATEGIC INSIGHT
मांडोवी नदी में फीकल कोलीफॉर्म का निर्धारित सीमा से अधिक पाया जाना जल गुणवत्ता और पर्यावरणीय निगरानी के लिए गंभीर चेतावनी है। स्थायी समाधान के लिए केवल प्रदूषण दर्ज करना पर्याप्त नहीं होगा; उसके स्रोतों की पहचान, सीवेज और अपशिष्ट जल का उचित उपचार तथा नियमित निगरानी भी आवश्यक है। अंतिम जिम्मेदारी तय करने और प्रभावी कार्रवाई करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की विस्तृत जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आगे के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
Source: Hindustan Times — Faecal coliform levels beyond permissible limits in Mandovi؛ The Indian Express — Goa's Mandovi river full of faecal coliform
