VoS NEWS DESK | SCIENCE & TECHNOLOGY | 10 OCTOBER 2026
भारत स्वयं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार की व्यापक डिजिटल महत्वाकांक्षाओं के बीच डेटा सेंटरों का निर्माण एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। ये केंद्र बड़ी मात्रा में डिजिटल जानकारी को सुरक्षित रखने, कंप्यूटिंग सेवाएँ उपलब्ध कराने और AI मॉडल को प्रशिक्षित करने तथा संचालित करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचा प्रदान करते हैं। हालाँकि, इस विस्तार के साथ ऊर्जा, जल संसाधनों और स्थानीय पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर भी गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार भारत को वैश्विक तकनीकी निवेश के लिए एक प्रमुख गंतव्य बनाने पर जोर देती रही है। देश में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की बड़ी संख्या, डिजिटल सेवाओं की बढ़ती माँग और तकनीकी क्षेत्र में उपलब्ध प्रतिभा ने भारत को अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए आकर्षक बाजार बनाया है। AI सेवाओं के विस्तार के कारण अब कंपनियों को ऐसे केंद्रों की जरूरत है जहाँ बड़ी मात्रा में डेटा का प्रसंस्करण किया जा सके और अत्याधुनिक कंप्यूटिंग प्रणालियाँ लगातार काम कर सकें।
इसी क्रम में अमेज़न ने वर्ष 2030 तक भारत में AI और संबंधित बुनियादी ढाँचे के लिए 21 अरब डॉलर के निवेश की योजना बनाई है। मुंबई के निकट एक बड़ी परियोजना का निर्माण भी इस व्यापक विस्तार का हिस्सा है। दूसरी ओर, गूगल ने आंध्र प्रदेश में अपने बड़े डेटा सेंटर संबंधी निवेश की योजनाओं को आगे बढ़ाया है। माइक्रोसॉफ्ट भी भारत में अपने क्लाउड और AI बुनियादी ढाँचे का विस्तार करने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल है। इन परियोजनाओं से तकनीकी सेवाओं की क्षमता बढ़ाने और डिजिटल अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देने की उम्मीद की जा रही है।
हालाँकि, इन परियोजनाओं के आसपास रहने वाले कुछ लोगों का कहना है कि बड़े निर्माण कार्यों से उनके दैनिक जीवन और स्थानीय वातावरण पर असर पड़ रहा है। मुंबई के निकट एक परियोजना के आसपास पेड़ों की कटाई और निर्माण गतिविधियों को लेकर विरोध सामने आया है। स्थानीय निवासियों ने आशंका जताई है कि बड़े डेटा सेंटरों के लिए आवश्यक संसाधनों की माँग पहले से मौजूद शहरी समस्याओं को और बढ़ा सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में एक हजार से अधिक निवासियों ने परियोजना को लेकर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि निर्माण प्रक्रिया में समुदाय से पर्याप्त परामर्श नहीं किया गया।
डेटा सेंटरों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में बिजली की निरंतर उपलब्धता शामिल है। AI से जुड़े कंप्यूटिंग कार्यों के लिए बड़ी संख्या में शक्तिशाली सर्वरों की आवश्यकता होती है, जिन्हें लगातार बिजली की जरूरत पड़ती है। यदि ऐसे केंद्रों का विस्तार तेजी से होता है, तो संबंधित क्षेत्रों में बिजली वितरण, ग्रिड क्षमता और ऊर्जा उत्पादन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसलिए परियोजनाओं की सफलता केवल तकनीकी क्षमता पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करेगी कि उन्हें ऊर्जा की आपूर्ति किस प्रकार की जाती है और स्थानीय बिजली उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा कैसे की जाती है।
पानी का सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कई डेटा सेंटरों में सर्वरों और अन्य उपकरणों से उत्पन्न गर्मी को नियंत्रित करने के लिए शीतलन प्रणालियों का उपयोग किया जाता है। कुछ प्रणालियों में पानी की आवश्यकता काफी अधिक हो सकती है, जबकि अन्य तकनीकों से इसकी खपत कम की जा सकती है। भारत के अनेक हिस्सों में जल उपलब्धता पहले से ही एक महत्वपूर्ण चुनौती है। ऐसे में यदि डेटा सेंटर उन क्षेत्रों में बनाए जाते हैं जहाँ स्थानीय आबादी को पानी की कमी का सामना करना पड़ता है, तो औद्योगिक जरूरतों और घरेलू उपयोग के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा।
कंपनियों की ओर से इन चिंताओं को कम करने के लिए अलग-अलग उपायों पर जोर दिया जा रहा है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, अमेज़न ने अपनी परियोजना के संदर्भ में पानी के बिना काम करने वाली शीतलन तकनीक और संसाधनों की अलग व्यवस्था जैसे उपायों का उल्लेख किया है। कंपनी ने समुदाय के साथ संवाद बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाने की बात कही है। हालांकि, स्थानीय लोगों के लिए इन आश्वासनों की वास्तविक उपयोगिता इस बात से स्पष्ट होगी कि परियोजना के संचालन के दौरान पानी, बिजली, शोर और पर्यावरण पर कितना प्रभाव पड़ता है।
इस मुद्दे का आर्थिक पहलू भी महत्वपूर्ण है। बड़े डेटा सेंटरों के निर्माण से निर्माण क्षेत्र, बिजली सेवाओं, नेटवर्किंग, सुरक्षा और तकनीकी रखरखाव जैसे क्षेत्रों में काम के अवसर पैदा हो सकते हैं। इनके माध्यम से भारत को वैश्विक AI सेवाओं के लिए निवेश आकर्षित करने और डिजिटल अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। लेकिन यह भी जरूरी है कि स्थानीय समुदायों को परियोजनाओं से होने वाले लाभों में उचित भागीदारी मिले और उनके सामने आने वाली समस्याओं का समय रहते समाधान किया जाए।
इस बहस के बीच नीति-निर्माताओं के सामने एक कठिन लेकिन महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। भारत को AI क्षेत्र में निवेश और नवाचार को प्रोत्साहित करना है, परंतु ऐसा करते समय पर्यावरणीय प्रभावों, जल संसाधनों, ऊर्जा सुरक्षा और स्थानीय नागरिकों की भागीदारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। परियोजनाओं की योजना बनाते समय पारदर्शिता, पर्यावरणीय आकलन और सार्वजनिक परामर्श को प्राथमिकता देना इस दिशा में उपयोगी कदम हो सकता है।
आने वाले वर्षों में भारत की AI रणनीति का मूल्यांकन केवल इस आधार पर नहीं होगा कि देश में कितने डेटा सेंटर बने या कितना विदेशी निवेश आया। यह भी देखा जाएगा कि इन केंद्रों ने स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को कितना लाभ पहुँचाया, संसाधनों का कितना कुशल उपयोग किया और विकास तथा पर्यावरण संरक्षण के बीच कितना संतुलन स्थापित किया।
VoS STRATEGIC INSIGHT
भारत में AI डेटा सेंटरों का विस्तार देश को वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान दिलाने का अवसर प्रदान करता है। इससे तकनीकी निवेश, क्लाउड सेवाओं और कंप्यूटिंग क्षमता में वृद्धि हो सकती है। लेकिन यदि इन परियोजनाओं से स्थानीय जल आपूर्ति, बिजली व्यवस्था और पर्यावरण पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, तो विकास की सामाजिक स्वीकार्यता प्रभावित हो सकती है।
भारत के लिए दीर्घकालिक रणनीति यह होनी चाहिए कि AI बुनियादी ढाँचे का विस्तार संसाधनों के कुशल उपयोग, पारदर्शी पर्यावरणीय आकलन और स्थानीय समुदायों के साथ प्रभावी संवाद के आधार पर किया जाए। तकनीकी प्रगति और नागरिक हितों को एक-दूसरे के विरुद्ध रखने के बजाय दोनों को साथ लेकर चलना ही इस क्षेत्र में टिकाऊ विकास का आधार बन सकता है।
Source: Reuters — Modi Wants India to Power the AI Age, Residents Are Pushing Back
