VoS NEWS DESK | शिक्षा एवं प्रौद्योगिकी | 14 अक्टूबर 2026
भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय रही है। राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में बड़ी संख्या में विद्यार्थी भाग लेते हैं और उनके परिणाम उच्च शिक्षा, व्यावसायिक पाठ्यक्रमों तथा भविष्य के रोजगार अवसरों को प्रभावित करते हैं। ऐसे में प्रश्नपत्र लीक होने, परीक्षा संचालन में अनियमितताओं और परिणामों को लेकर उठने वाले सवाल विद्यार्थियों तथा उनके अभिभावकों के लिए चिंता का कारण बनते हैं।
इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स गठित की है। नीलेकणि सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अपने अनुभव और डिजिटल प्रणालियों के विकास में योगदान के लिए जाने जाते हैं। परीक्षा सुधारों के संदर्भ में उनकी भूमिका का उद्देश्य तकनीकी समाधानों के माध्यम से परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के विकल्प तलाशना है।
प्रस्तावित योजना का एक प्रमुख हिस्सा प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में बदलाव है। इसके तहत विभिन्न विषयों और कठिनाई स्तरों के प्रश्नों का एक बड़ा डिजिटल प्रश्न बैंक बनाया जा सकता है। परीक्षा के दिन इसी प्रश्न बैंक से निर्धारित मानकों के अनुसार प्रश्न चुने जाने का प्रस्ताव है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पहले से तैयार प्रश्नपत्र के अनधिकृत रूप से बाहर आने के जोखिम को कम करना है।
परंपरागत परीक्षा प्रणाली में प्रश्नपत्र तैयार करने, छपाई, पैकेजिंग और परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित पहुंचाने जैसे कई चरण शामिल होते हैं। प्रत्येक चरण में सुरक्षा बनाए रखना आवश्यक होता है। यदि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया अधिक डिजिटल और नियंत्रित बनाई जाती है, तो प्रश्नों तक अनधिकृत पहुंच की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, डिजिटल व्यवस्था में भी साइबर सुरक्षा, डेटा की गोपनीयता और अधिकृत व्यक्तियों की पहुंच को नियंत्रित करना अनिवार्य होगा।
AI की सहायता से प्रश्नपत्र तैयार करने का विचार भी इसी सुधार प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता निर्धारित पाठ्यक्रम, विषयवार आवश्यकताओं और कठिनाई स्तरों के अनुसार प्रश्न तैयार करने या उपलब्ध प्रश्नों को व्यवस्थित करने में सहायता कर सकती है। इससे परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं को प्रश्नों की बड़ी संख्या का प्रबंधन करने और अलग-अलग प्रश्नपत्रों के बीच संतुलन बनाए रखने में सुविधा मिल सकती है।
लेकिन AI से तैयार प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना आवश्यक होगा। केवल तकनीक के आधार पर किसी प्रश्न को सही, निष्पक्ष या पाठ्यक्रम के अनुरूप नहीं माना जा सकता। विशेषज्ञों द्वारा प्रश्नों की समीक्षा, उत्तरों की जांच और भाषा की स्पष्टता का परीक्षण भी महत्वपूर्ण रहेगा। इसके अलावा, प्रश्नपत्र में किसी प्रकार की त्रुटि या पक्षपात की संभावना को कम करने के लिए स्पष्ट मानक और जवाबदेही तय करनी होगी।
प्रस्तावित सुधारों का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं का विस्तार है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में लगभग 1.5 लाख स्थानों पर कंप्यूटर आधारित परीक्षाएं आयोजित करने के लिए केंद्रों की उपलब्धता का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन स्थानों की वास्तविक क्षमता, उनकी तकनीकी तैयारी और देशव्यापी उपयोग के लिए आवश्यक नेटवर्क विस्तार का आकलन करना होगा।
कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली में विद्यार्थियों को निर्धारित केंद्र पर कंप्यूटर के माध्यम से प्रश्न हल करने होते हैं। इससे प्रश्नपत्रों की छपाई और भौतिक वितरण पर निर्भरता कम हो सकती है। साथ ही, उत्तरों के डिजिटल रिकॉर्ड, समय प्रबंधन और परिणामों के प्रसंस्करण को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है। लेकिन इसके लिए प्रत्येक केंद्र पर पर्याप्त कंप्यूटर, स्थिर बिजली आपूर्ति, विश्वसनीय इंटरनेट या सुरक्षित नेटवर्क, तकनीकी सहायता और प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता होगी।
भारत जैसे विशाल देश में परीक्षा केंद्रों की समान उपलब्धता सुनिश्चित करना भी बड़ी चुनौती है। महानगरों में डिजिटल सुविधाएं अपेक्षाकृत बेहतर हो सकती हैं, जबकि दूरदराज के क्षेत्रों में नेटवर्क, बिजली और उपकरणों की कमी विद्यार्थियों के लिए कठिनाई पैदा कर सकती है। इसलिए कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं का विस्तार करते समय ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे शहरों और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की जरूरतों को ध्यान में रखना होगा।
परीक्षा व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल से पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ विद्यार्थियों के डेटा की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण होगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रश्नपत्र तैयार करने, सुरक्षित रखने और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में साइबर हमलों तथा डेटा लीक के जोखिम मौजूद रह सकते हैं। इन जोखिमों को कम करने के लिए मजबूत एन्क्रिप्शन, सीमित पहुंच, नियमित सुरक्षा परीक्षण और आपातकालीन व्यवस्थाओं की जरूरत होगी।
इस सुधार योजना का एक उद्देश्य परीक्षा संचालन में मानवीय त्रुटियों को कम करना भी है। यदि प्रश्नपत्रों का चयन निर्धारित नियमों के आधार पर किया जाता है और डिजिटल प्रणाली का नियमित ऑडिट होता है, तो कुछ प्रक्रियाओं में एकरूपता लाई जा सकती है। फिर भी परीक्षा संचालन की निगरानी, शिकायतों का समाधान और किसी तकनीकी गड़बड़ी की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था आवश्यक बनी रहेगी।
विद्यार्थियों के दृष्टिकोण से भी इस बदलाव की तैयारी महत्वपूर्ण होगी। कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं में प्रश्नों का उत्तर देने के लिए विषय की जानकारी के साथ स्क्रीन पर पढ़ने, समय का प्रबंधन करने और डिजिटल इंटरफेस का उपयोग करने का अभ्यास भी उपयोगी हो सकता है। यदि परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव लागू किए जाते हैं, तो विद्यार्थियों को पर्याप्त समय, अभ्यास परीक्षाएं और स्पष्ट निर्देश उपलब्ध कराना जरूरी होगा।
इसके साथ ही, किसी भी नई प्रणाली को लागू करने से पहले सीमित स्तर पर परीक्षण करना उचित होगा। अलग-अलग राज्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में परीक्षण के माध्यम से तकनीकी समस्याओं, प्रश्नपत्र की गुणवत्ता और परीक्षा केंद्रों की क्षमता का मूल्यांकन किया जा सकता है। प्राप्त अनुभव के आधार पर सुधार करके ही देशव्यापी विस्तार अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
यह भी स्पष्ट रहना चाहिए कि AI और कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं से जुड़ी सभी संभावनाएं अभी प्रस्तावित सुधारों का हिस्सा हैं। इन्हें सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में लागू करने के लिए संबंधित संस्थाओं के निर्णय, तकनीकी तैयारी, बजट, नियम और समयबद्ध कार्ययोजना की आवश्यकता होगी। इसलिए प्रस्तावित योजना और लागू हो चुकी नीति के बीच अंतर समझना जरूरी है।
VoS STRATEGIC INSIGHT
नंदन नीलेकणि की प्रस्तावित परीक्षा सुधार योजना भारत की शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल तकनीक और AI की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। प्रश्न बैंक, परीक्षा के दिन प्रश्नों का चयन और कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं का विस्तार प्रश्नपत्र लीक होने के जोखिम को कम करने तथा परीक्षा संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद कर सकते हैं।
हालांकि, तकनीक अपने आप में सभी समस्याओं का समाधान नहीं है। इसकी सफलता मजबूत साइबर सुरक्षा, विशेषज्ञों द्वारा प्रश्नपत्रों की समीक्षा, पारदर्शी निगरानी और सभी विद्यार्थियों को समान सुविधाएं उपलब्ध कराने पर निर्भर करेगी। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल ढांचे को मजबूत किए बिना कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं का व्यापक विस्तार असमानता बढ़ा सकता है।
भारत के लिए सबसे प्रभावी रास्ता यह होगा कि परीक्षा सुधारों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए, विद्यार्थियों को पर्याप्त तैयारी का समय दिया जाए और प्रत्येक चरण के परिणामों का स्वतंत्र मूल्यांकन किया जाए। यदि तकनीकी नवाचार के साथ निष्पक्षता, गोपनीयता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी जाती है, तो परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति संभव है।
Source: Loksatta — नंदन नीलेकणि की परीक्षा सुधार योजना, AI और प्रश्नपत्र सुरक्षा
