VoS NEWS DESK | EDUCATION & TECHNOLOGY | 22 अक्टूबर 2026
एचपी के HP Futures 2026 वैश्विक सर्वेक्षण में 6,000 से अधिक छात्रों को शामिल किया गया, जिनमें भारत के 758 छात्र भी थे। सर्वेक्षण एआई के बढ़ते उपयोग, शिक्षा के बदलते तरीकों और भविष्य के रोजगार के लिए आवश्यक कौशल पर केंद्रित था। इसके निष्कर्षों से पता चलता है कि छात्र नई तकनीक के लाभों को स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन पढ़ाई में समझ, याददाश्त और आलोचनात्मक सोच के महत्व को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहते।
सर्वेक्षण के अनुसार, भारतीय छात्रों का एक बड़ा हिस्सा एआई को समय बचाने और कार्यों को अधिक तेजी से पूरा करने में उपयोगी मानता है। एआई आधारित उपकरण कठिन विषयों को सरल भाषा में समझाने, अध्ययन सामग्री का सार बनाने, प्रश्न तैयार करने और किसी विषय के अलग-अलग पहलुओं पर जानकारी हासिल करने में सहायता कर सकते हैं। इन सुविधाओं के कारण विद्यार्थियों के लिए अपनी पढ़ाई को व्यवस्थित करना आसान हो सकता है।
हालांकि, जानकारी जल्दी प्राप्त कर लेना और किसी विषय को वास्तव में समझ लेना दो अलग-अलग बातें हैं। यदि विद्यार्थी बिना सामग्री को समझे एआई से तैयार उत्तरों पर निर्भर हो जाएं, तो उन्हें परीक्षा में स्वयं उत्तर लिखने, समस्या हल करने या किसी विचार को अपने शब्दों में समझाने में कठिनाई हो सकती है। इसी कारण सर्वेक्षण में पारंपरिक अध्ययन तरीकों के प्रति छात्रों की रुचि एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में सामने आई।
रिपोर्ट के मुताबिक, 82 प्रतिशत भारतीय छात्र पढ़ी गई सामग्री को याद रखने के लिए हाथ से लिखे या प्रिंट किए गए नोट्स जैसे तरीकों को पसंद करते हैं। लिखित नोट्स बनाते समय विद्यार्थी जानकारी को चुनते हैं, महत्वपूर्ण बिंदुओं को अलग करते हैं और उन्हें अपनी समझ के अनुसार व्यवस्थित करते हैं। यह प्रक्रिया उन्हें सामग्री पर दोबारा विचार करने और मुख्य अवधारणाओं को पहचानने का अवसर देती है।
सर्वेक्षण में भारतीय छात्रों का भविष्य के रोजगार को लेकर भरोसा भी सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार, 92 प्रतिशत भारतीय छात्रों का मानना था कि उनकी शिक्षा उन्हें रोजगार बाजार के लिए तैयार कर रही है। इसके अतिरिक्त, 78 प्रतिशत छात्रों ने माना कि एआई कुछ नौकरियों को समाप्त करने के साथ-साथ नए रोजगार अवसर भी पैदा कर सकता है, जबकि 87 प्रतिशत ने कहा कि वे अपने भविष्य के करियर में एआई उपकरणों का प्रभावी और जिम्मेदार इस्तेमाल करने को लेकर आश्वस्त हैं। ये आंकड़े सर्वेक्षण में शामिल छात्रों की राय को दर्शाते हैं; इन्हें भारत के सभी छात्रों की सोच का पूर्ण प्रतिनिधित्व नहीं माना जाना चाहिए।
शिक्षा विशेषज्ञों के सामने अब यह सवाल है कि तकनीक को पढ़ाई में किस तरह शामिल किया जाए ताकि विद्यार्थी केवल तैयार जानकारी प्राप्त करने तक सीमित न रहें। एआई का इस्तेमाल किसी कठिन अवधारणा की व्याख्या पाने, अभ्यास प्रश्न बनाने या अपनी लिखी सामग्री की भाषा सुधारने के लिए किया जा सकता है। लेकिन विद्यार्थियों को तथ्यों की जांच करने, अलग-अलग स्रोतों की तुलना करने और उत्तर को स्वयं समझने की आदत भी विकसित करनी चाहिए।
शिक्षकों की भूमिका इस बदलाव में महत्वपूर्ण बनी हुई है। कक्षा में ऐसे कार्य दिए जा सकते हैं जिनमें विद्यार्थी पहले किसी विषय को स्वयं पढ़ें, फिर अपने नोट्स तैयार करें और उसके बाद एआई की सहायता से अतिरिक्त जानकारी हासिल करें। इसके बाद उनसे यह समझाने को कहा जा सकता है कि एआई से मिली जानकारी उनके मूल नोट्स से किस तरह अलग है और कौन-से तथ्य विश्वसनीय स्रोतों से सत्यापित किए गए हैं। इससे तकनीक का उपयोग सीखने की प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए किया जा सकता है।
डिजिटल शिक्षा के साथ-साथ बुनियादी कौशलों को बनाए रखना भी आवश्यक है। पढ़ना, लिखना, गणितीय समझ, तर्कशक्ति और समस्या हल करने की क्षमता किसी भी विषय की शिक्षा का आधार हैं। यदि विद्यार्थी इन कौशलों में मजबूत होंगे, तो वे एआई द्वारा दी गई जानकारी का मूल्यांकन करने और गलत या अधूरी सामग्री की पहचान करने में बेहतर स्थिति में होंगे।
सर्वेक्षण में शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने पर भी जोर दिया गया। रिपोर्ट से जुड़े विशेषज्ञों ने आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता और अन्य दीर्घकालिक कौशलों को शिक्षा का केंद्रीय हिस्सा बनाने की जरूरत बताई। एआई के दौर में केवल उपकरण चलाना सीखना पर्याप्त नहीं होगा; विद्यार्थियों को यह भी समझना होगा कि किसी समस्या का विश्लेषण कैसे किया जाए, जानकारी की सत्यता कैसे जांची जाए और तकनीक का जिम्मेदार उपयोग कैसे किया जाए।
VoS STRATEGIC INSIGHT
एचपी सर्वेक्षण का प्रमुख संदेश यह है कि भारतीय छात्र एआई और पारंपरिक अध्ययन तरीकों को एक-दूसरे का विकल्प मानने के बजाय साथ इस्तेमाल कर सकते हैं। एआई तेजी से जानकारी प्राप्त करने में मदद कर सकता है, जबकि अपने नोट्स बनाना, लिखकर अभ्यास करना और स्वयं उत्तर तैयार करना विषय की गहरी समझ विकसित करने में उपयोगी हो सकता है। भविष्य की शिक्षा में तकनीक के साथ बुनियादी कौशल, आलोचनात्मक सोच और स्वतंत्र रूप से सीखने की क्षमता को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण होगा।
