VoS NEWS DESK | INTERNATIONAL | 3 OCTOBER 2026
G7 देशों ने शुक्रवार को घोषणा की कि वे ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए अपने आपातकालीन तेल और ईंधन भंडार का एक बड़ा हिस्सा बाजार में जारी करेंगे। Reuters के अनुसार कुल 100 मिलियन बैरल डीजल और कच्चे तेल को समन्वित तरीके से जारी करने पर सहमति बनी है।
G7 में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान शामिल हैं। इन देशों का यह निर्णय ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में ईंधन की कीमतों और आपूर्ति को लेकर दबाव बढ़ा हुआ है।
योजना के तहत International Energy Agency इस आपातकालीन भंडार को बाजार में लाने की प्रक्रिया के समन्वय में भूमिका निभाएगी। G7 के संयुक्त बयान के अनुसार लगभग चार महीने की अवधि में विभिन्न चरणों के माध्यम से भंडार जारी किया जाएगा।
इस योजना में डीजल को विशेष महत्व दिया गया है क्योंकि डीजल की कीमतों में वृद्धि का असर केवल निजी वाहनों तक सीमित नहीं रहता। ट्रक, मालवाहक वाहन, कृषि मशीनरी, निर्माण उपकरण, औद्योगिक मशीनें और कई अन्य आर्थिक गतिविधियां डीजल पर निर्भर हैं।
ऊर्जा की कीमतों में लगातार वृद्धि होने पर परिवहन लागत बढ़ सकती है और इसका असर वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इसी कारण बड़े ऊर्जा भंडार रखने वाले देशों द्वारा बाजार में अतिरिक्त ईंधन उपलब्ध कराने के फैसले को वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता से जोड़ा जा रहा है।
Reuters के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सहयोगी देशों से अपने ईंधन भंडार जारी करने का आग्रह किया था। G7 के निर्णय के बाद IEA के कार्यकारी निदेशक فاتح بیرول ने कहा कि तेल की कीमतों में गिरावट शुरू हुई है। उनके अनुसार घोषणा के बाद तेल की कीमत में लगभग 5 डॉलर की कमी देखी गई।
हालांकि ऊर्जा बाजार पर केवल सरकारी भंडार का प्रभाव नहीं पड़ता। तेल की कीमतें वैश्विक मांग, उत्पादन, समुद्री परिवहन, आपूर्ति मार्गों, क्षेत्रीय संघर्षों और प्रमुख तेल उत्पादक देशों के फैसलों से भी प्रभावित होती हैं।
G7 के निर्णय में ऊर्जा उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंधों से बचने का संकल्प भी शामिल है। Reuters के अनुसार समूह ने ऊर्जा और ऊर्जा से संबंधित उत्पादों के बीच सहयोग बनाए रखने पर जोर दिया है।
इस कदम का एक प्रमुख उद्देश्य बाजार को यह संकेत देना है कि प्रमुख औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं के पास आपातकालीन परिस्थितियों में अतिरिक्त ईंधन उपलब्ध कराने की क्षमता मौजूद है। इससे बाजार में तत्काल आपूर्ति की चिंता को कम करने में मदद मिल सकती है।
International Energy Agency इस प्रक्रिया के दौरान बाजार की स्थिति पर नजर रखेगी। यदि परिस्थितियां और अधिक दबाव वाली होती हैं तो उपलब्ध भंडार और भविष्य के कदमों पर सदस्य देशों के बीच फिर से चर्चा की जा सकती है।
भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों के लिए भी वैश्विक तेल बाजार में होने वाली ऐसी गतिविधियां महत्वपूर्ण हैं। कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का असर आयात बिल, परिवहन लागत और घरेलू ईंधन बाजार पर पड़ सकता है।
दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं द्वारा आपातकालीन भंडार जारी करने का फैसला यह भी दिखाता है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में आपूर्ति और कीमतों की स्थिरता को लेकर सरकारें किस स्तर पर समन्वय कर रही हैं।
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G7 का 100 मिलियन बैरल तेल और डीजल जारी करने का फैसला वैश्विक ऊर्जा बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए एक समन्वित कदम है। IEA इस प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका निभाएगी। हालांकि इस फैसले का दीर्घकालिक प्रभाव वैश्विक तेल उत्पादन, मांग, परिवहन और भू-राजनीतिक परिस्थितियों सहित कई कारकों पर निर्भर करेगा।
Source: Reuters / International Energy Agency / G7 Leaders’ Statement
