VoS NEWS DESK | NATIONAL | 26 सितम्बर 2026
FSSAI की ओर से जारी प्रस्ताव में कहा गया है कि ‘Analogue in Dairy Context’ श्रेणी के तहत पहले से लाइसेंस प्राप्त या पंजीकृत उत्पाद अपने नाम, लेबल या मार्केटिंग में ‘Paneer’ शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
एनालॉग उत्पाद ऐसे खाद्य उत्पाद होते हैं जो पारंपरिक डेयरी उत्पाद के समान दिखाई या इस्तेमाल किए जा सकते हैं, लेकिन उनकी संरचना और सामग्री वास्तविक डेयरी उत्पाद से अलग हो सकती है।
FSSAI ने Food Safety and Standards (Prohibition and Restrictions on Sales) Regulations, 2011 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य ऐसे उत्पादों के निर्माण और बिक्री को नियंत्रित करना है जिन्हें पनीर के रूप में पेश किए जाने से उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक संरचना के बारे में गलतफहमी हो सकती है।
प्राधिकरण के अनुसार, यदि कोई उत्पाद वास्तविक पनीर की निर्धारित श्रेणी में नहीं आता है, तो उसे अपने लेबल, नाम और प्रचार में इस तरह प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए जिससे उपभोक्ता उसे पारंपरिक पनीर समझे।
इस प्रस्ताव का असर खाद्य निर्माताओं, डेयरी उत्पाद कारोबार और उन कंपनियों पर पड़ सकता है जो डेयरी के विकल्प या एनालॉग उत्पाद तैयार करती हैं।
FSSAI का कदम खाद्य उत्पादों की लेबलिंग और उपभोक्ता जानकारी से जुड़े नियमों को अधिक स्पष्ट बनाने की दिशा में भी देखा जा रहा है। प्रस्ताव के तहत उत्पाद की पहचान और उसकी वास्तविक संरचना के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
भारत में पनीर का इस्तेमाल घरों, रेस्तरां और खाद्य उद्योग में बड़े पैमाने पर होता है। ऐसे में पनीर के नाम से बिकने वाले वैकल्पिक उत्पादों की सही पहचान उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य केवल नाम बदलना ही नहीं बल्कि उन उत्पादों के विपणन को नियंत्रित करना भी है जिन्हें उपभोक्ताओं के सामने वास्तविक पनीर के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।
FSSAI ने यह प्रस्ताव खाद्य सुरक्षा और मानकों से जुड़े मौजूदा नियमों में संशोधन के हिस्से के रूप में रखा है।
आगे की प्रक्रिया में प्रस्तावित बदलावों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और नियामक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
VoS STRATEGIC INSIGHT
FSSAI का प्रस्ताव खाद्य लेबलिंग, उत्पाद की पारदर्शिता और उपभोक्ता जानकारी पर केंद्रित है। यदि प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं, तो एनालॉग डेयरी उत्पादों को ‘पनीर’ के नाम से बाजार में पेश करने के तरीके में बदलाव आ सकता है।
Source: FSSAI; Akashvani News; Government of India.
