VoS NEWS DESK | EDUCATION | 20 September 2026
उत्तराखंड मेडिकल एजुकेशन विभाग के अनुसार NEET-UG काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान फ्रीडम फाइटर डिपेंडेंट कोटा के तहत आवेदन करने वाले पांच उम्मीदवारों के प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए। संबंधित जिला अधिकारियों द्वारा सत्यापन के बाद इन प्रमाणपत्रों को फर्जी पाया गया और इनके आधार पर दिए गए चार MBBS दाखिले रद्द कर दिए गए।
मेडिकल एजुकेशन विभाग के निदेशक अशुतोष सायना ने बताया कि चार छात्राओं के दाखिले आधिकारिक रूप से रद्द किए गए हैं। यह कार्रवाई उन दस्तावेजों की जांच के बाद की गई, जिनका इस्तेमाल मेडिकल सीट हासिल करने के लिए विशेष कोटा का लाभ लेने में किया गया था।
मामले में पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। रिपोर्टों के अनुसार इनमें चार छात्राएं और एक अभिभावक शामिल हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कथित फर्जीवाड़ा केवल इन आवेदनों तक सीमित था या इसके पीछे कोई व्यापक नेटवर्क भी हो सकता है।
जांच के दौरान कुछ दस्तावेजों में रिकॉर्ड की कमी, अधूरी जानकारी और ऐसे पते पाए गए जिन्हें सत्यापित नहीं किया जा सका। इन विसंगतियों के बाद प्रमाणपत्रों की वैधता पर सवाल उठे और संबंधित जिला अधिकारियों से उनका सत्यापन कराया गया।
अधिकारियों ने बताया कि उत्तराखंड में NEET काउंसलिंग ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से की जाती है और उम्मीदवारों की मेरिट तथा परिणाम ऑनलाइन प्रदर्शित किए जाते हैं। हालांकि, विशेष श्रेणी के प्रमाणपत्रों की वास्तविकता की पुष्टि के लिए अब अतिरिक्त सत्यापन प्रक्रिया पर भी जोर दिया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने देहरादून के क्लेमेंट टाउन और रायपुर थानों में मामले दर्ज किए हैं। इनमें भारतीय न्याय संहिता की उन धाराओं को शामिल किया गया है जो कथित धोखाधड़ी और दस्तावेजों की जालसाजी से संबंधित हैं।
मेडिकल एजुकेशन विभाग ने यह भी कहा है कि भविष्य में उत्तराखंड NEET काउंसलिंग से लाभ लेने वाले उम्मीदवारों द्वारा जमा किए गए प्रमाणपत्रों को संबंधित जारी करने वाले अधिकारियों के पास भौतिक सत्यापन के लिए भेजा जाएगा। यह प्रक्रिया डोमिसाइल या अन्य श्रेणियों के प्रमाणपत्रों पर भी लागू की जा सकती है।
अधिकारियों के अनुसार दूसरे दौर की काउंसलिंग उस समय जारी थी और शैक्षणिक सत्र अभी शुरू नहीं हुआ था। इसलिए संबंधित छात्राओं ने कॉलेज में अपनी पढ़ाई शुरू नहीं की थी। इस स्थिति में दाखिले रद्द करने की प्रशासनिक कार्रवाई की गई।
यह मामला मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में विशेष श्रेणी के प्रमाणपत्रों की जांच और सत्यापन की भूमिका को भी सामने लाता है। MBBS जैसी अत्यधिक प्रतिस्पर्धी सीटों में किसी विशेष कोटे के तहत पात्रता सीधे प्रवेश प्रक्रिया को प्रभावित करती है, इसलिए प्रमाणपत्रों की वैधता की पुष्टि महत्वपूर्ण होती है।
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उत्तराखंड का यह मामला मेडिकल प्रवेश में दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करता है। चार MBBS दाखिलों को रद्द करने का निर्णय संदिग्ध प्रमाणपत्रों की जांच और संबंधित अधिकारियों द्वारा सत्यापन के बाद लिया गया।
प्रशासनिक स्तर पर दाखिले रद्द किए गए हैं, जबकि पुलिस की कार्रवाई अलग कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। दस्तावेजों के इस्तेमाल और कथित फर्जीवाड़े से जुड़े आरोपों की जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है।
आगे की जांच से यह स्पष्ट होगा कि मामला केवल पहचाने गए उम्मीदवारों तक सीमित था या प्रमाणपत्र तैयार करने और इस्तेमाल करने से जुड़ी कोई व्यापक गतिविधि भी इसमें शामिल थी।
Source: India Today; Hindustan Times; ANI.
