सुप्रीम कोर्ट ने APAAR योजना के तहत बच्चों के आधार डेटा की सुरक्षा पर दिया विशेष जोर

VoS NEWS DESK | नई दिल्ली | 26 जुलाई 2026

सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर बल दिया कि बच्चों के शैक्षणिक रिकॉर्ड और पहचान संबंधी जानकारी का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही किया जाना चाहिए। न्यायालय ने पारदर्शी डेटा प्रबंधन, सुरक्षित डिजिटल प्रणाली तथा प्रभावी निगरानी तंत्र की आवश्यकता पर भी विशेष ध्यान आकर्षित किया। अधिकारियों ने बताया कि शिक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधारों के साथ सुरक्षा मानकों को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल शिक्षा प्लेटफ़ॉर्म छात्रों की शैक्षणिक प्रगति को बेहतर ढंग से व्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन डेटा सुरक्षा के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा उपाय और स्पष्ट नियम आवश्यक हैं। अभिभावकों का विश्वास बनाए रखने के लिए यह भी जरूरी है कि व्यक्तिगत जानकारी के उपयोग और संरक्षण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो।

शिक्षा और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि आधुनिक डिजिटल प्रणालियाँ शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बना सकती हैं, बशर्ते छात्रों की निजता और संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। सुरक्षित डेटा प्रबंधन से भविष्य में डिजिटल शिक्षा परियोजनाओं के प्रति विश्वास और अधिक मजबूत होगा।

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विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल शिक्षा के विस्तार के साथ डेटा सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बढ़ती है। यदि मजबूत साइबर सुरक्षा, पारदर्शी डेटा प्रबंधन और स्पष्ट गोपनीयता मानकों को प्रभावी रूप से लागू किया जाता है, तो भारत की डिजिटल शिक्षा व्यवस्था अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और छात्र-केंद्रित बन सकती है।

स्रोत: VoS News Desk

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