VoS NEWS DESK | विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी | 27 जुलाई 2026
शोधकर्ताओं ने बताया कि नई बैटरी में ऐसे विशेष पदार्थों और उन्नत रासायनिक संरचना का उपयोग किया गया है, जो चार्जिंग और डिस्चार्जिंग के दौरान बनने वाली सूक्ष्म दरारों को स्वतः भरने की क्षमता रखते हैं। यही दरारें समय के साथ बैटरी की क्षमता कम होने का प्रमुख कारण बनती हैं। इस नई तकनीक से बैटरी अधिक समय तक प्रभावी ढंग से काम कर सकती है और उसकी विश्वसनीयता भी बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक बड़े पैमाने पर सफल होती है, तो इलेक्ट्रिक वाहनों के रखरखाव की लागत में कमी आएगी और उपभोक्ताओं को अधिक टिकाऊ तथा भरोसेमंद बैटरियाँ उपलब्ध होंगी। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की गति भी तेज हो सकती है, क्योंकि बैटरी की लंबी आयु EV उद्योग की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रही है।
ऊर्जा और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि दुनिया भर में स्वच्छ ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लिए बैटरी तकनीक में निरंतर नवाचार आवश्यक है। स्वयं-मरम्मत करने वाली बैटरियाँ भविष्य में न केवल इलेक्ट्रिक कारों बल्कि ऊर्जा भंडारण प्रणालियों, ड्रोन और अन्य आधुनिक उपकरणों में भी उपयोगी साबित हो सकती हैं।
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विशेषज्ञों के अनुसार स्वयं-मरम्मत करने वाली बैटरी तकनीक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है। यदि आगामी परीक्षण सफल रहते हैं और इसका व्यावसायिक उत्पादन शुरू होता है, तो यह तकनीक इलेक्ट्रिक वाहनों की दक्षता, विश्वसनीयता और दीर्घायु को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकती है, साथ ही स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी।
स्रोत: VoS News Desk
