VoS NEWS DESK | ECONOMY | 19 September 2026
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 17 सितंबर तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह में साल-दर-साल 12.96 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में यह वृद्धि भारत सरकार के प्रत्यक्ष कर राजस्व में बढ़ोतरी को दर्शाती है। आंकड़े वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल से सितंबर के मध्य तक की अवधि से संबंधित हैं।
प्रत्यक्ष करों में मुख्य रूप से कॉरपोरेट टैक्स और व्यक्तिगत आयकर जैसी श्रेणियां शामिल होती हैं। सरकार के लिए प्रत्यक्ष कर संग्रह राजस्व का महत्वपूर्ण स्रोत है, जिससे सार्वजनिक खर्च, सरकारी योजनाओं और अन्य वित्तीय आवश्यकताओं के लिए संसाधन उपलब्ध होते हैं।
इसी अवधि में सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 15.19 प्रतिशत बढ़कर 14.32 लाख करोड़ रुपये हो गया। सकल आंकड़े में रिफंड से पहले प्राप्त कर शामिल होते हैं, जबकि शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह में करदाताओं को दिए गए रिफंड को समायोजित किया जाता है।
आयकर विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में सरकार द्वारा जारी किए गए रिफंड भी बढ़े। 17 सितंबर तक रिफंड की राशि लगभग 2.20 लाख करोड़ रुपये रही, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 29.19 प्रतिशत अधिक थी। इस वजह से सकल और शुद्ध कर संग्रह की वृद्धि दर में अंतर दिखाई देता है।
नेट कॉरपोरेट टैक्स संग्रह लगभग 5.56 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह करीब 4.65 लाख करोड़ रुपये था। इसी तरह नेट नॉन-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह लगभग 6.16 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले साल की समान अवधि के लगभग 5.81 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
प्रतिभूति लेन-देन कर यानी Securities Transaction Tax (STT) से प्राप्त शुद्ध संग्रह भी बढ़ा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 17 सितंबर तक STT संग्रह लगभग 40,214 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह लगभग 26,306 करोड़ रुपये था।
सकल आधार पर भी कॉरपोरेट और नॉन-कॉरपोरेट कर संग्रह में वृद्धि दर्ज की गई। आंकड़ों के अनुसार सकल कॉरपोरेट टैक्स संग्रह करीब 6.95 लाख करोड़ रुपये और सकल नॉन-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह करीब 6.98 लाख करोड़ रुपये रहा। ये आंकड़े पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में अधिक हैं।
कर संग्रह के इन आंकड़ों का संबंध केवल कंपनियों से नहीं है। प्रत्यक्ष कर आंकड़ों में कंपनियों के अलावा व्यक्तिगत करदाता, फर्म, संस्थाएं और कानून के तहत आने वाली अन्य कर श्रेणियां भी शामिल होती हैं। इसलिए कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह देश के व्यापक कर आधार और राजस्व गतिविधि का संयुक्त आंकड़ा होता है।
रॉयटर्स के अनुसार 1 अप्रैल से 17 सितंबर के बीच भारत का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 13 प्रतिशत बढ़कर 12.1 ट्रिलियन रुपये यानी लगभग 12.1 लाख करोड़ रुपये रहा। इसी अवधि में सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 15 प्रतिशत से अधिक बढ़कर लगभग 14.3 ट्रिलियन रुपये रहा।
हालांकि अप्रैल से सितंबर के मध्य तक के आंकड़े पूरे वित्त वर्ष की अंतिम तस्वीर नहीं देते। वित्त वर्ष 2026-27 में अभी कई महीने बाकी हैं और आने वाले समय में कॉरपोरेट टैक्स भुगतान, व्यक्तिगत आयकर, रिफंड और आर्थिक गतिविधियों में बदलाव कुल वार्षिक संग्रह को प्रभावित कर सकते हैं।
कर संग्रह में वृद्धि सरकार की राजस्व स्थिति को प्रभावित करती है, लेकिन केवल कर संग्रह के आंकड़ों के आधार पर पूरी अर्थव्यवस्था की स्थिति का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। आर्थिक वृद्धि, निवेश, रोजगार, उपभोग, आय और सरकारी खर्च जैसे कई अन्य संकेतक भी व्यापक आर्थिक तस्वीर का हिस्सा होते हैं।
आने वाले महीनों में आयकर विभाग द्वारा जारी किए जाने वाले आंकड़े यह दिखाएंगे कि प्रत्यक्ष कर संग्रह की मौजूदा वृद्धि किस गति से आगे बढ़ती है। विशेष रूप से रिफंड और सकल संग्रह में बदलाव पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि दोनों मिलकर शुद्ध कर संग्रह को प्रभावित करते हैं।
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17 सितंबर 2026 तक भारत के शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह में करीब 13 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज हुई और यह 12.12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसी दौरान सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 15.19 प्रतिशत बढ़कर 14.32 लाख करोड़ रुपये रहा।
आंकड़ों में कॉरपोरेट और नॉन-कॉरपोरेट दोनों कर संग्रह में वृद्धि दिखाई देती है, जबकि रिफंड भी पिछले वर्ष की तुलना में अधिक रहे। इसका अर्थ है कि शुद्ध संग्रह का आंकड़ा सकल संग्रह की तुलना में अलग गति से बढ़ा है।
यह अभी वित्त वर्ष के शुरुआती छह महीनों से कम अवधि का डेटा है। इसलिए पूरे वित्त वर्ष के राजस्व प्रदर्शन का आकलन करने के लिए आगे आने वाले मासिक और अंतिम वार्षिक आंकड़ों को देखना आवश्यक होगा।
Source: Reuters; Income Tax Department; Economic Times; Moneycontrol.
