VoS NEWS DESK | राष्ट्रीय | 21 सितंबर 2026
दिल्ली में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान कुछ मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियों या पिछले SIR रिकॉर्ड से मैपिंग नहीं होने के आधार पर नोटिस जारी किए गए हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के अनुसार, 31 अगस्त को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची उन जानकारियों के आधार पर तैयार की गई थी जो मतदाताओं द्वारा Enumeration Forms के माध्यम से बूथ लेवल अधिकारियों को उपलब्ध कराई गई थीं। इसके बाद रिकॉर्ड से संबंधित कुछ मामलों में सिस्टम द्वारा नोटिस जारी किए गए।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने स्पष्ट किया कि नोटिस जारी होने का अर्थ मतदाता का नाम हटाना नहीं है। कार्यालय ने कहा कि ECINET प्रणाली में डेटा को सही करने के लिए सिस्टम-जनरेटेड नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
अधिकारी कार्यालय ने यह भी कहा कि किसी भी मतदाता का नाम बिना उसे अपनी बात रखने का अवसर दिए और उचित आदेश के बिना हटाया नहीं जा सकता। नोटिस प्राप्त करने वाले व्यक्ति को निर्धारित प्रक्रिया के तहत जवाब देने और अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिया जाएगा।
SIR प्रक्रिया के दौरान कुछ प्रमुख सार्वजनिक हस्तियों को भी नोटिस मिलने की रिपोर्ट सामने आई है। इनमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और CBI निदेशक प्रवीण सूद समेत अन्य नाम शामिल हैं।
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी समेत अन्य प्रमुख लोगों को भी नोटिस मिलने की रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। हालांकि इन नोटिसों के संदर्भ में निर्वाचन अधिकारियों की मुख्य स्थिति यही है कि नोटिस स्वयं मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का अंतिम निर्णय नहीं है।
चुनाव आयोग के दिल्ली कार्यालय ने मीडिया में सामने आई चिंताओं के संदर्भ में कहा कि नोटिसों को मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के अंतिम कदम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज विवरणों की समीक्षा और रिकॉर्ड से संबंधित विसंगतियों को दूर करना है। इस प्रक्रिया में मतदाताओं से उनके दस्तावेज और जानकारी से संबंधित स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है।
निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, मतदाता सूची से किसी नाम को हटाने से पहले निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है। इसमें संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देना और उसके बाद उचित आदेश जारी करना शामिल है।
यह स्पष्टीकरण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि SIR नोटिसों की संख्या और कुछ प्रमुख लोगों के नाम सामने आने के बाद इस प्रक्रिया को लेकर सार्वजनिक चर्चा तेज हुई है।
रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली में लाखों लोगों को रिकॉर्ड से संबंधित नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें कुछ मामलों में पिछले SIR रिकॉर्ड से मैपिंग नहीं होने या उपलब्ध विवरणों में अंतर होने जैसे कारण बताए गए हैं।
निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि सिस्टम द्वारा जारी नोटिसों का उद्देश्य रिकॉर्ड की जांच और आवश्यक सुधार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।
मतदाताओं के लिए अगला महत्वपूर्ण चरण नोटिस का जवाब देना और आवश्यक दस्तावेज या जानकारी उपलब्ध कराना होगा। इसके बाद संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा निर्वाचन अधिकारियों द्वारा की जाएगी।
SIR प्रक्रिया के अंतिम परिणाम के बाद दिल्ली की मतदाता सूची में कितने नाम जोड़े, हटाए या संशोधित किए जाते हैं, इसका आकलन अधिक स्पष्ट रूप से किया जा सकेगा।
VoS STRATEGIC INSIGHT
दिल्ली SIR को लेकर सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि नोटिस मिलना और मतदाता सूची से नाम हटाया जाना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि नोटिस अपने आप में नाम हटाने का आदेश नहीं है।
निर्वाचन प्रक्रिया में रिकॉर्ड की जांच के दौरान मतदाताओं से स्पष्टीकरण और दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। किसी नाम को हटाने से पहले सुनवाई और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक है।
इसलिए SIR से संबंधित मामलों में अंतिम स्थिति नोटिस जारी होने के बजाय संबंधित व्यक्ति की सुनवाई, दस्तावेजों की जांच और निर्वाचन अधिकारी के अंतिम आदेश के बाद स्पष्ट होगी।
स्रोत: दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय; Election Commission of India; The New Indian Express; Indian Express.
