VoS NEWS DESK | INTERNATIONAL DIPLOMACY | 16 SEPTEMBER 2026
2026 का BRICS शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित हुआ, जिसमें 11 उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं ने भाग लिया। Reuters के अनुसार सम्मेलन ने भारत को Global South के मुद्दों पर अपनी भूमिका सामने रखने का अवसर दिया, जबकि चीन ने भी समूह के भीतर आर्थिक और तकनीकी सहयोग बढ़ाने से जुड़ी कई पहलों को आगे बढ़ाया।
सम्मेलन में BRICS देशों ने आर्थिक सहयोग, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, डिजिटल वित्तीय ढांचे और तकनीकी सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा की। चीन की ओर से BRICS AI Open Source Zone और आर्थिक एकीकरण को आगे बढ़ाने के प्रस्ताव भी रखे गए। भारत और चीन क्रमशः 2026 और 2027 में समूह की अध्यक्षता कर रहे हैं।
BRICS के भीतर भारत और चीन के बीच सहयोग के साथ-साथ अलग-अलग राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का प्रश्न भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार विस्तारित BRICS में विभिन्न देशों की विदेश नीतियां और आर्थिक हित अलग-अलग हैं, जिससे समूह के भीतर साझा नीतियों पर सहमति बनाना कई मामलों में चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
शिखर सम्मेलन के दौरान BRICS देशों ने मध्य पूर्व में बढ़ती हिंसा पर चिंता जताते हुए अधिकतम संयम और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। नई दिल्ली घोषणा में बहुपक्षीय दृष्टिकोण और संवाद के माध्यम से विवादों के समाधान की बात कही गई।
भारत के लिए BRICS का महत्व केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है। समूह वैश्विक संस्थानों में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका, व्यापार, वित्तीय व्यवस्था और तकनीकी सहयोग जैसे विषयों को भी प्रभावित करता है। दूसरी ओर, भारत के पश्चिमी देशों के साथ व्यापार, तकनीक, निवेश और रणनीतिक सहयोग के संबंध भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
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वर्तमान घटनाक्रम भारत की विदेश नीति के उस व्यापक संदर्भ को दिखाता है जिसमें नई दिल्ली को विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर अलग-अलग देशों के साथ अपने हितों और सहयोग के क्षेत्रों के अनुसार संबंध विकसित करने पड़ते हैं। BRICS का विस्तार इस बहुपक्षीय ढांचे को और व्यापक बना रहा है, जबकि समूह के सदस्य देशों के बीच प्राथमिकताओं में अंतर भी बना हुआ है।
Sources: Reuters, New Delhi BRICS Summit coverage.
